SIDHI : रोजी-रोटी कमाने के लिए निकले सीधी जिले के 43 मजदूर पहुंचे तेलंगाना, ठेकेदार छोड़कर भागा तो चार माह बाद हुई घर वापसी


सीधी । घर से रोजी-रोटी कमाने के लिए निकले मध्य प्रदेश के सीधी जिले के 43 मजदूर महाराष्ट्र, कर्नाटक होते हुए तेलंगाना पहुंचे। वहां उन्हें ले जाने वाला महाराष्ट्र का ठेकेदार छोड़कर भाग गया। इधर-उधर भटकते मजदूरों को कोई ठिकाना न मिला तो वे तंबू गाड़कर हैदराबाद के एक गांव में रहे। मजदूरों ने किसी तरह सीधी पुलिस से संपर्क किया तो पुलिस-प्रशासन ने चार माह बाद मंगलवार को इनकी घर वापसी करवाई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस-प्रशासन के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया है।

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पुलिस के मुताबिक सीधी जिले के करमाई गांव के 14 पुरुष, 11 महिलाएं 17 बच्चों सहित करीब चार माह पहले मजदूरी के लिए महाराष्ट्र के ठेकेदार के साथ गए थे। मजदूर एक महीने महाराष्ट्र, फिर कर्नाटक और फिर हैदराबाद के वानापर्थी जिला ले जाए गए। वहां ठेकेदार ने पूरी मजदूरी नहीं दी और इन्हें छोड़कर भाग गया। ऐसे में खाने-पीने का संकट झेलते हुए मजदूरों ने तंबू गाड़े और ठंड में वहीं पर कई दिन गुजारे।

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मजदूरों की किसी तरह वहां के सरपंच से पहचान हो गई तो उसने खेत में सभी को काम दे दिया। मजदूर मोती लाल ने करीब दस दिन पहले सीधी जिले के मझौली थाना टीआइ सतीश मिश्रा से संपर्क कर आपबीती बताई। टीआइ ने एसपी पंकज कुमावत को जानकारी दी तो एसपी ने टीम बनाकर हैदराबाद भेजी। टीम ने वानापर्थी जिले के एसपी से सहायता मांगी, तब वानापर्थी एसपी ने ट्रेन से सभी मजदूरों को हैदराबाद से सतना भिजवाया।

इनका कहना

सीधी के करमाई गांव के 43 आदिवासी मजदूर हैदाराबाद में फंसे थे। उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इनमें महिला, पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं।

पंकज कुमावत, पुलिस अधीक्षक सीधी

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