INDORE : माडलिंग की दुनिया : लुक और वाक से ही नहीं, कई मापदंड़ों से होती है परख

इंदौर । माडलिंग की दुनिया में करियर बनाना एक बात है और किसी स्पर्धा विशेष के लिए तैयारी करना दूसरी बात। मिस इंडिया, मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्ड सभी में प्रतिभागियों को अलग-अलग मापदंडों से परखा जाता है। यदि आप मिस इंडिया के लिए तैयारी कर रही हैं तो उसमें प्रतिभागी का आत्मविश्वास, बात करने का तरीका, चलने का ढंग, आत्मविश्वास को प्रमुखता से देखा जाता है। 

छेड़छाड़ से तंग आकर 11वीं की छात्रा ने किया सुसाइड : सुसाइड नोट में लिखा कॉलोनी के ही लड़के का नाम : फिर हुआ ये ..

इसके अलावा इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है कि आप समाज के लिए क्या करेंगी। मिस यूनिवर्स के मंच पर फिटनेस, बात करने का तरीका, कम्यूनिकेशन स्कील, परिधान, दर्शकों से जुड़ाव और व्यतित्व को भी देखा जाता है। अक्सर माडल्स केवल अपने रूप और चलने के ढंग पर ही ध्यान देती हैं और सफलता से पीछे रह जाती हैं। यह कहना है 2014 में मिस दिवा यूनिवर्स रह चुकी नोयोनिता लोध का जो मंगलवार को शहर में थी। शहर में होने जा रहे 'मिस्टर, मिस एंड मिसेस मध्यप्रदेश 2021' के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर परफार्म करने की जानकारियां देने के लिए नोयोनिता व कोरियोग्राफर यतिन गांधी शहर आए हुए हैं।

लड़की से संबंध बनाने की शर्त : मैनेजर बोला- मैडम आपमें बहुत आकर्षण है, मुझसे दोस्ती कर लो सब काम हो जाएगा

मीडिया से हुई खास चर्चा में नोयोनिता ने कहा कि कोरोना का असल फैशन-माडलिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा था लेकिन इस इंडस्ट्री ने अपने रास्ते बहुत ही खूबसूरती से निकाल लिए। इंटरनेट मीडिया को चुनते हुए डिजाइनर्स ने कलेक्शन भी लांच किए, माडल्स को शोकेस का मौका भी मिला, विज्ञापन और दर्शकों का प्रतिसाद भी मिला। इस महामारी के दौर में हम सभी ने यह महसूस किया कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों कितना जरूरी है, इसलिए मैंने मानसिक स्वास्थ्य पर भी काम करना शुरू किया और इसे अपनी वर्कशाप में शामिल किया। मैं एक एनजीओ के साथ जुड़कर एचआईवी पाजिटिव बच्चों के लिए भी काम करती हूं। इसमें मैंने देखा कि जिन बच्चों का कोई दोष नहीं हम उन्हें प्यार, सम्मान और अपनापन देने के बजाय दोष देते हैं। जबकि उन्हें इसके साथ यदि सही दिशा-निर्देशन और सहयोग मिले तो वे भी बहुत बेतहर काम कर सकते हैं।

अजब गजब : दूसरे की पत्नी को वश में करने अखबार में तांत्रिकों के विज्ञापन देखकर करवाता था तंत्र : फिर ..

बाडी बिल्डिंग से ज्यादा फिटनेस जरूरी

यतिन गांधी का मानना है कि यदि कोई लड़का माडलिंग में आना चाहता है पहले उसे खुद को इस तरह तैयार करना होगा कि लोग उसे देख पूछें कि क्या वह माडल है ना कि उसे बताना पड़े कि मैं माडल हूं। खुद के अनुरूप कपड़ों का चयन, मेकअप, हेयरस्टाइल का ज्ञान तो उसे होना ही चाहिए। माडलिंग में बाडी होना अच्छी बात है पर यह जरूरी नहीं। जरूरी है तो फिटनेस। बाडी बिल्डिंग करके ही इस क्षेत्र में नहीं आया जा सकता।

Powered by Blogger.