MP : 30 हजार रुपए के लिए अस्पताल में 9 घंटे पड़ा रहा कोविड पॉजिटिव का शव, ऊर्जा मंत्री के दखल के बाद दिया

ग्वालियर। आपदा के दौर में निजी अस्पताल एक-एक रुपए के लिए लोगों को परेशान कर रहे हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल प्रबंधन असंवेदनशील हो चुका है। ग्वालियर के लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित माहेश्वरी नर्सिग होम में महज 30 हजार रुपए के लिए कोविड पॉजिटिव के शव को परिजन को नहीं सौंपा गया।

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बाहर मृतक का पिता और अन्य परिजन बिखलते रहे, लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन बिना बिल चुकाए शव देने को तैयार नहीं था। बुधवार दोपहर 3 बजे जब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह और एडवोकेट अतिसुंदर सिंह ने हस्तक्षेप किया, तो हॉस्पिटल प्रबंधन ने शव ले जाने दिया।

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दतिया सेवढ़ा निवासी हरिओम पटेल (28) पुत्र पित्तर सिंह पटेल को करीब 6 दिन पहले परिजन तबीयत बिगड़ने पर ग्वालियर लेकर आए थे। यहां माहेश्वरी नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था। परिजन बल्लू पटेल ने बताया कि 6 दिन पहले डॉक्टर ने उसे सामान्य ICU में भर्ती किया था।

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हरिओम के लंग्स और लीवर में इंफेक्शन बताया गया था। तीन दिन पहले हरिओम को संक्रमित आने पर कोविड वार्ड में भर्ती किया गया था। इस समय हॉस्पिटल प्रबंधन ने बताया था कि हर दिन का 10 हजार रुपए खर्च आएगा, लेकिन कोविड वार्ड में भर्ती करने के तीसरे दिन बुधवार सुबह 6 बजे हरिओम की मौत हो गई। जब परिजन ने शव को ले जाना चाहा, तो डॉक्टरों ने 63 हजार का बिल थमा दिया।

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हरिओम के पिता ने समझाया कि वह गरीब परिवार से है। उसके पास इतना रुपया नहीं है। 33 हजार रुपए वह पहले ही जमा कर चुका है। अब उसके पास एक भी पैसा नहीं है। इस पर नर्सिंग होम प्रबंधन ने शव को नहीं ले जाने दिया। यह पता चलते ही वहां हरिओम के स्थानीय रिश्तेदार भी आ गए। हॉस्पिटल प्रबंधन से गुहार लगाई, लेकिन 30 हजार रुपए बकाया को लेकर शव नहीं दिया गया।

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बुधवार सुबह 6 बजे मौत की खबर मिलने के बाद दोपहर के 3 बजे तक परिजन संघर्ष करते रहे। इसके बाद मृतक के रिश्तेदार कमल सिंह पटेल वहां पहुंचे। उन्होंने भी डॉक्टरों से बात की, लेकिन बिना भुगतान डॉक्टर शव को देने के लिए तैयार ही नहीं थे।

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9 घंटे बाद मंत्री के फोन पर माना हॉस्पिटल प्रबंधन

जब सुबह से शव अस्पताल में पड़े-पड़े 9 घंटे बीत गए तो कमल सिंह पटेल ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को मामले से अवगत कराया। साथ ही, एडवोकेट अतिसुंदर सिंह भी पहुंच गए। ऊर्जा मंत्री ने मामले में माहेश्वरी नर्सिंग होम के प्रबंधन से बात की। ऊर्जा मंत्री के कहने पर हॉस्पिटल प्रबंधन माना और शव देने को तैयार दिया। दोपहर 3 बजे परिजन को शव मिला। इसके बाद कोविड गाइडलाइन के तहत शव को अंतिम संस्कार किया गया।

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