REWA : जैसा सेनापति वैसे सैनिक : बड़ों को संरक्षण छोटो पर कार्यवाही, तू डाल डाल मैं पात पात की कहावत को चरितार्थ करते हुए अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल

(ग्राउंड एमपी 17 ऋतुराज द्विवेदी की रिपोर्ट ) रीवा न्यूज. जैसा सेनापति वैसे ही सिपाही होते हैं कभी किसानों के सब्जियों को जहरीली बताने तो कभी किसानों के साथ मारपीट करने को लेकर सुर्खियों में रहने वाले पुलिस कप्तान राकेश कुमार सिंह के सिपहसालार कम नहीं है कुछ इसी तरह की भूमिका में इन दिनों नजर आ रहे हैं अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल। जो शायद पुलिस कप्तान को यह बताना चाह रहे हैं कि अगर तू डाल-डाल है तो मैं पात पात।

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एक तरफ जहां सब्जी बेचकर गुजारा करने वाली ठेला संचालकों के तराजू का बांट को जप्त कर कार्यवाही करने का दम भरने वाली रीवा पुलिस खुद खाकी के संरक्षण में खुलेआम व्यापार करती नजर आ रही है। 

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सख्त लॉकडाउन पालन कराने का जिम्मा उठाने वाली पुलिस की भूमिका पर ही परस चैनल लगने लगा है। जी हां अमहिया थाने से महज 10 कदम दूर स्थित दुकाने पूरे दिन जहां खुली हुई दिखाई दे रही है वही जमकर लोग खरीदारी कर रहे हैं बावजूद इसके नमकीन बिस्कुट हुआ चाय रुपी टैक्स लेकर पुलिस मौन धारण किए हुए। अब तो लोग इन दुकानों को देखकर यह कहने लगे कि पुलिस विभाग जहां बड़े व्यापारियों को संरक्षण दे रही है वही छोटे व्यापारियों पर कहर बनकर टूट रही है।

दिलकश अंदाज

जिले के पुलिस कप्तान की विशेष नग का दर्जा प्राप्त कर चुके अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल का अंदाज दिलकश है फिल्मी अंदाज में पुलिसगिरी करने की मंशा रखने वाले थाना प्रभारी को शायद यह नहीं पता कि धरातल पर जिन पर वह खाकी का खौफ दिखा रहे हैं वह तो केवल निरीह व्यक्ति है जबकि इन दिनों प्रभारी के किस्से तो हर जुबान में छाए हुए हैं चाहे वह गत दिनों केंद्रीय जेल में जाने वाले राजश्री सिगरेट व कफ सिरप के पकड़े जाने का मामला हो या फिर नशे के सौदागर ऊपर शिकंजा कसने की बात हो ,शिकंजा किस लिए कसा जाता है यह सभी को पता है बाकी स्थानीय जनप्रतिनिधियों जाने। हालांकि कुछ विशेष लोगों द्वारा विशेष सफलता व कर्तव्य निष्ठा दिखाने से भी पीछे नहीं रहते भले ही वह बनावटी ही क्यों ना हो।

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सरफरोशी की है तमन्ना

इन दिनों जिले की कानून व्यवस्था को लेकर जहां किसान संगठन साफ तौर पर कह रहे हैं कि साहब हमें लट्ठमार एसपी नहीं चाहिए यह कहने के बाद वह एक प्रसिद्ध गीत के कुछ शब्द गुनगुनाते हैं जिसमें कहा जाता है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में, लेकिन ब्रिटिश कालीन पुलिस मैनुअल पर काम करने वाली रीवा पुलिस रीवा के कमजोर वर्ग मजदूर किसान और व्यापारियों से केवल एक ही गीत सुनने के लिए आतुर दिखाई दे रही है वह गीत भी उस समय लिखा गया था जब देश में ब्रिटिश हुकूमत थी उस गीत के कुछ अंश कुछ यह है जन गण मन अधिनायक जय हो भारत भाग्य विधाता..... रहना है तू गाना तो पड़ेगा खैर शायद किसान व सड़क पर छोटे मोटे व्यवसाय कर जीवन यापन करने वाले लोगों का दर्द जिले के हुक्मरानों तक नहीं पहुंच पा रहा यही कारण है कि कहीं चाल चरित्र चेहरा की बात करने वाली पार्टी अब भैया जी से राय लेती दिख रही है।


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