REWA : अंतिम संस्कार के बाद शनिवार की सुबह परिजन अस्थियां लेने पहुंचे तो पैरों तले से खिसक गई जमींन : पढ़िए पूरी खबर

रीवा। दो दिन पूर्व कोविड प्रोटोकॉल के तहत बदरिया मुक्तिधाम में जिस वृद्धा का अंतिम संस्कार किया गया, उसके परिजन शनिवार की सुबह जब अस्थियां लेने पहुंचे तो उनके पैरों तले से जमींन खिसक गई। जिस जगह वृद्धा का अंतिम संस्कार हुआ था, वहां अस्थियां नहीं मिली। अंतत: परिजन इस स्थान की मिट्टी समेट विसर्जन के लिए प्रयागराज लेकर गए। सतना जिले के वार्ड क्रमांक-6 मुख्तियारगंज में गायत्री मंदिर के पास रहने वाली पैसुनिया बाई पटेल पति स्व. भोला प्रसाद की संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मृत्यु होने पर गुरुवार को नगर निगम के माध्यम से अंतिम संस्कार कराया गया था।

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बेटे सूरज पटेल ने मुखाग्नि दी थी। शनिवार की सुबह सतना से सूरज सहित पांच लोग अस्थियां लेने रीवा पहुंचे। जहां अंतिम संस्कार किया गया था, वहां लिपाई-पोताई के साथ ही जवा और नमक आदि पड़ा था। यह देखकर परिजन हैरान रह गए। अस्थियां न मिलने पर वे काफी व्यथित हुए। अस्थियां न मिलने से परिजन काफी आहत हुए हैं।

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यहां से अस्थियां कहीं फेंक दी गई या फिर कोई दूसरा व्यक्ति उठा ले गया, यह स्पष्ट रुप से तो नहीं कहा जा सकता। परिजन कहते हैं कि इस तरह की लापरवाही क्षमा योग्य नहीं है। परिजन ने यह मांग उठाई है कि मुक्तिधाम में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि फिर किसी के साथ ऐसी स्थिति निर्मित न हो। अस्थियां तो सुरक्षित रहनी ही चाहिए। नगर निगम प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए।

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कोविड प्रोटोकॉल के तहत जो अंतिम संस्कार हो रहे हैं, उनकी अस्थियां चार-पांच दिन तक नहीं उठाई जाती। ज्यादातर के परिजन अस्थियां लेने नहीं आते हैं। ऐसे में अस्थियों को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। पैसुनिया बाई का अंतिम संस्कार दो दिन पूर्व ही हुआ था, इसलिए अभी अस्थियां उठाने का सवाल ही नहीं उठता। ऐसा लगता है कि कोई दूसरा व्यक्ति धोखे से इनकी अस्थियां ले गया।""

रंजीत सिंह, प्रभारी, कोविड अंतिम संस्कार

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