REWA : अक्षय तृतीया पर विशेष मुहूर्त : शादी विवाह रोकने जिला प्रशासन ने बनाया कॉल सेंटर, 9179270359 नंबर पर फोन करते ही पहुंचेगी टीम

(ग्राउंड एमपी 17 ऋतुराज द्विवेदी की रिपोर्ट ) अक्षय तृतीया का पर्व शुक्रवार को जिलेभर में शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म के मुताबिक यह एक ऐसा दिन है। जिस दिन मुहूर्त नहीं देखा जाता है। ​बल्कि कोई भी शुभ कार्य के लिए अक्षय तृतीया का दिन विशेष होता है। अबूझ मुहूर्त वाले खास दिन को चोरी छिपे सर्वाधिक बाल विवाह होते है। पिछले कई वर्षों से अक्षय ​तृतीया पर प्रशासन द्वारा बाल विवाह को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। लेकिन कोरोना काल में दो साल से हालात बदल गए है। अब इस मुहूर्त पर बाल विवाह तो क्या बालिग और जवान तक विवाह नहीं कर सकते है। क्योंकि कोरोना के बढ़ रहे संक्रमण को लेकर जिलेभर में लॉकडाउन लगाया गया है। यहां 30 मई तक शादी विवाह में पूर्ण रूपेण रोक लगा दी गई।

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फिर भी यदि चोरी छिपे कहीं पर विवाह होता है तो उसके लिए कॉल सेंटर बनाया गया। ऐसे में 9179270359 नंंबर पर फोन कर बाल विवाह सहित अन्य कार्यक्रमों की शिकायत दर्ज करा सकते है। शिकायत दर्ज होते ही पुलिस, प्रशासन व महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कार्यक्रम रोकने का प्रयास करेगी। अगर आयोजक फिर भी नहीं मानते तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

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गांव गांव में होगी निगरानी

जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि अक्षय तृतीया के दिन गांव गांव पर निगरानी बढ़ा दी गई है। यहां पर राजस्व, पुलिस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी स​हायिका, आशा कार्यकर्ता, सचिव और रोजगार सहायक सहित महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर के माध्यम से सूचना संक्रलन की जाएगी। साथ ही क्षेत्र के प्रतिष्ठत लोगों को भी विवाह रोकवाने की अपील की गई है। वही आम जनता से वैवाहिक कार्यक्रमों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर नजर रखने को कहा गया है।

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दो साल तक की सजा का प्रावधान

18 वर्ष से कम उम्र की लड़की एवं 21 वर्ष से कम लड़का का विवाह करना गैर कानूनी है। बाल विवाह जैसी कुरीति को दूर करने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 मे पारित किया गया था। इस कानून में पीड़ितों को सुरक्षा व राहत प्रदान करने के साथ साथ ऐसे विवाह को प्रोत्साहन मदद देने या विवाह संपन्न कराने के अपराध में जुर्माना एवं कारावास की सजा का प्रावधान है। बाल विवाह कराना व उससे सहयोग करना, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत गैर कानूनी है। ऐसे करने पर 2 वर्ष तक का सश्रम कारावास या एक लाख तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते है।

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