REWA : फ्रंटलाइन वर्कर्स के हालत ख़राब : शहर के सफाई कर्मचारियों को नगर निगम की ओर से नहीं दिए गए संसाधन : नालों में उतर रहे नंगे पांव

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रीवा। कोरोना काल में सरकार ने विशेष सेवाओं में जुड़े लोगों को संबोधन के लिए नया नाम दिया है। जिसमें शहर की सफाई व्यवस्था का कार्य देखने वाले कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स का दर्जा दिया गया। यह सब केवल कागजी संबोधन रह गए। जान जोखिम में डालकर शहर की गंदगी को साफ करने वाले इन श्रमिकों को संसाधन एवं सुविधाएं देने में प्रशासन पीछे हट रहा है। इनदिनों बरसात का मौसम शुरू हो गया है, सफाई कर्मचारियों को नाले-नालियों की सफाई के लिए लगाया गया है। 

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इन्हें संसाधन नहीं दिए जाने की वजह से नंगे पांव ही नाले में उतारा जा रहा है। जिसमें आए दिन पैर में चोंट लग रही है। कोरोना काल में सफाई व्यवस्था काफी अहम थी, जिसमें अपनी जान की बाजी लगाकर शहर की सफाई और सेनेटाइजेशन के कार्य में नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों को लगाया था। उस दौरान दावा किया गया था कि इन्हें विशेष रूप से संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। समय के साथ आश्वासन भी हवा हो गया। इनदिनों बिना जूता-चप्पल के ही सफाई कर रहे हैं। जिससे समस्या बढ़ती जा रही है।

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प्राथमिक उपचार तक का इंतजाम नहीं

नालियों की सफाई के दौरान पैर में कांच, लोहा आदि लगने से आए दिन सफाई कर्मचारी चोटिल हो रहे हैं। इनके प्राथमिक उपचार तक के इंतजाम नगर निगम की ओर से नहीं किए गए हैं। जिन कर्मचारियों को चोट लगती है, वह अपने संसाधन पर ही उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। हाल के दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई के दौरान कई सफाई कर्मचारी चोटिल हो चुके हैं।

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सफाई मित्र का नाम भी कागज तक

कुछ समय पहले सरकार ने प्रदेश भर के नगरीय निकायों के कर्मचारियों को सफाई कर्मचारी की जगह सफाई मित्र का नाम दिया था। यह नाम भी कागजी रह गया। सरकार की ओर से इन कर्मियों के लिए किसी तरह के संसाधन के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इस पर सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जिस संसाधन की जरूरत है, वह मिले तो बेहतर तरीके से कार्य किए जा सकते हैं।

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हर साल बरसात के पहले सामग्री वितरित करने का प्रावधान

नगर निगम द्वारा सफाई कर्मचारियों को हर साल बरसात के पहले जरूरत की सामग्री दी जाती रही है। इस साल अब तक किसी तरह की चर्चा भी नहीं है। जबकि सफाई कर्मचारियों को हेलमेट, जैकेट, रेनकोट, ग्लब्स, मास्क, गमबूट, टार्च सहित अन्य आवश्यक सामग्री दी जानी चाहिए। बीते साल भी कुछ सामग्री दी गई थी वह भी बरसात का समय पूरा होने के बाद मिली थी। '

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