RAKHI SPECIAL : प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर : जानिए 18 साल पहले गणेश जी के लिए राखी बनाने और उसकी तैयारी की कहानी ...

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इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणेश को रक्षा बंधन पर इस बार 4.5 किलो की राखी बांधी गई। इसे पालरेचा परिवार ने बनाया है। 18 साल से वह राखी तैयार कर रहा है। हर बार अलग-अलग थीम पर बनाते आ रहे हैं। 40X40 इंच की इस बार की राखी की खासियत है, इसमें भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप नजर आएगा। इसे अष्टधातु से आकार दिया है। सोने और चांदी का उपयोग किया गया है। राखी के माध्यम से जनता को ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचनम्’ और तू चिंता मत कर, मैं हूं ना.. का संदेश दिया जाएगा। 

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इंदौर के महावीर बाग में रहने वाले पुण्डरीक पालरेचा ने बताया कि 40 साल पहले उनके पिता ने राखी के व्यापार शुरू किया था। उस वक्त से ही सबसे पहले भगवान गणेश की राखी बनाते थे। 18 साल पहले फ्रेंड्स के ग्रुप ने सुझाव दिया कि जब राखी बनाते ही हैं, तो उसे भगवान को बांधिए भी..। बस, फिर क्या था उसी साल से खजराना गणेश को बड़ी राखी चढ़ाने की यह परपंरा शुरू हुई। 32 इंच से शुरू हुई राखी अब बढ़ते-बढ़ते 40 इंच तक पहुंच गई है। आज परिवार के सबसे छोटा सदस्य भी राखी बनाने में मदद करता है। इसके अलावा महाकाल, वीर अलीजा सरकार मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भगवान को अर्पित करने के भी राखी तैयार की जाती है।

                                    पालरेचा परिवार द्वारा अष्टधातु से निर्मित बड़ी राखी।

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अब तक इस थीम पर राखी की गई है अर्पित

पुण्डरीक पालरेचा ने बताया, भगवान गणेश को अब तक लड्डू, भारत का नक्शा, सर्वधर्म, नवग्रह, 12 ज्योर्तिलिंग, शाकाहार, गंगाजल कलश, त्रिशूल वाली इलेक्ट्रिक राखी, रुपए वाली राखी, चारधाम, समुंद्र मंथन, बेटी बचाओ, सत्यमेव जयते, कामधेनु, तिरूपति बालाजी, सूर्यनारायण, चारों वेद, ओम नम: शिवाय का जाप करने वाली इलेक्ट्रानिक राखी अर्पित की जा चुकी है।

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तीन माह से तैयार की जा रही थी राखी

परिवार के पुण्डरीक पालरेचा के मुताबिक खजराना गणेश के लिए राखी को बनाने में 3 माह का समय लगा है। इस काम में परिवार के सदस्यों द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है। राखी का वजन करीब 4.5 किलो है, जबकि आकार में 40X40 इंच की है। राखी भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित है।

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अष्टधातु का हुआ इस्तेमाल, गुजरात के कारीगरों ने की मदद

राखी में अष्टधातु का इस्तेमाल किया गया है। राखी के मध्य भाग में भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप दर्शाया गया है। इसे बनाने में गुजरात के कारीगरों की भी मदद ली गई है। राखी में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां सूरत, जामनगर, अहमदाबाद, दिल्ली और मुंबई से लाकर प्रयुक्त की गई हैं।

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