सतना के बेटे ने देश को किया गौरवान्वित : सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर रत्नेश पाण्डेय ने किया फतह : शिखर पर फहराया तिरंगा

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74वें स्वतंत्रता दिवस से पहले सतना के बेटे ने देश को गौरवान्वित किया है। पर्वतारोही रत्नेश पांडेय ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह किया है। रत्नेश पांडेय ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो को चढ़ने के बाद प्रदेश में नया रिकार्ड बनाया। रत्नेश 8 दिन में सबसे कठिनतम चढ़ाई चढ़ने में सफलता पाई है। ये धरती से 5,895 मीटर की उंचाई पर है।

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मसाई और चेगा जनजाति से मिले

अफ्रीका महाद्वीप के दौरे पर गए रत्नेश पांडेय ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि मेरे साथ यूएई, अमेरिका, इटली, नेपाल और कनाडा पर्वतरोही भी थे। इसमें अफ्रीका की जनजाति मसाई और चेगा से मुलाकात कर संस्कृति से रूबरू हुए। इस दौरान रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन की तरफ से जनजाति की मदद की गई। इंदौर जिला खेल अधिकारी जोसेफ बक्सला ने 6 जुलाई को एक्सपीडिशन फ्लैग ऑफ किया था। ऐसे में किलिमंजारो शिखर पर रत्नेश पाण्डेय ने खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया।

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माउंट एवरेस्ट पर गाया था राष्ट्रगान

2015 में रत्नेश पांडेय को प्रदेश सरकार ने प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया था। इसके बाद उन्होंने सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतेह कर जन-गण-मन राष्ट्रगान गाया था। अब तक वह 7 देशों में भारत, नेपाल, रूस, ईरान, किर्गिस्तान, इटली, स्विटजरलैंड की चोटियों को फतह कर चुके हैं। इसमें एवरेस्ट के अलावा माउंट एवरेस्ट, पीक 6265 मीटर, दमावंड, सबलन, लाबूचे, स्टोक कांगरी, फ्रेंडशिप पीक समेत दूसरे पर्वतों की सफलता पूर्वक चढ़ाई पूरी की थी। वह दुनिया के पहले किन्नरों के दल को पर्वता रोहण कराकर हिमालय की चोटी फतेह कराने का श्रेय भी लिया था।

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चार अवाॅर्ड हासिल कर चुके हैं रत्नेश

रत्नेश पांडेय ने बताया कि उनका शौक सिर्फ ट्रैकिंग करना ही नहीं है। उनकी झोली में बाइक राइडिंग के विश्व स्तरीय खिताब भी है। रत्नेश ने 32.3 किलोमीटर दोनों हाथ छोड़कर बाइक चलाई है। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। तीसरा कमाल उन्होंने पीछे की ओर मुंह करके 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। तीन करतब दिखाकर तीन विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। साथ ही कोरोना काल में रोजाना 500 मवेशियों को भोजन कराने पर रत्नेश फाउंडेशन को चौथे अवॉर्ड के रूप में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स मिला है।

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ऐसे हुई थी पर्वतों में चढ़ने की शुरुआत

रत्नेश पांडेय भारत, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में गठित और एशियन ट्रैकिंग कंपनी नेपाल की संरक्षण में नेपाल के माउंट एवरेस्ट में ट्रैकिंग करने के इरादे से काठमांडू पहुंचे थे। 2015 में नेपाल में भूकंप आने की वजह से एवरेस्ट चढ़ने का सपना पूरा नहीं हुआ था। तूफान में फंसने से उसका दल से संपर्क टूट गया। यहां घर-परिवार वाले भी चिंतित थे। उस दौरान हुए हादसे में 21 विदेशी पर्वतारोहियों ने जान गंवाई थी। तीन दिन बाद नेपाल सेना का हेलीकॉप्टर रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप ले आया था। बावजूद इसके रत्नेश ने अपना हौसला नहीं खोया। दोबारा प्रयास के बाद फतह हासिल ही कर ली।

रत्नेश ने ऐसे तय किया किलिमंजारो का सफर

- 9 जुलाई को दिल्ली से अफ्रीका रवाना।

- 10 जुलाई को अफ्रीका महाद्वीप के कंजानिया देश पहुंचे।

- 11 जुलाई को पर्वत में चढ़ने की शुरुआत की।

- 14 जुलाई को 14,980 ​फीट उंचे माउंट मेरु पहुंचे।

- 15 जुलाई से 100 किमी दूर किलिमंजारो पर्वत की चढ़ाई शुरू की।

- 21 जुलाई को 19, 340 फीट उंचे अफ्रीका महादीप की सबसे उंची चोटी को फतह किया।

- 22 जुलाई को नीचे उतरे।

- 23 से 28 जुलाई तक अफ्रीका की जनजाति के लोगों के साथ रहे। साथ ही रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन ने आर्थिक मदद की।

- 29 जुलाई से 7 अगस्त तक अफ्रीका के जंगलों की सफारी करते हुए वन्य जीवों का अध्ययन किया।

- 8 अगस्त को नरोवी से दिल्ली के लिए रवाना।

- 9 अगस्त को दिल्ली एयर पोर्ट पहुंचे।

- 11 अगस्त को इंदौर पहुंचे। 

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