MP : इस गणेश मंदिर में अब तक 1 लाख से अधिक लोगों ने लगाई अर्जियां, 60 हजार लोगों की अर्जियां हो चुकीं पूरी

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प्रथम पूज्य भगवान गणेश की देश भर में कई प्रसिद्ध मंदिर और उससे जुड़ी किवदंतियां सुनी होगी, लेकिन संस्कारधानी में एक अर्जी वो गणेशजी का मंदिर लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। नर्मदा तट पर बने इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामना पूरी करने की लिखित अर्जी एक नारियल के साथ लगाते हैं। अब तक 1.80 लाख अर्जियां लगाई जा चुकी हैं। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि इसमें से 60 हजार की मनोकामना पूरी हो चुकी है। हर अर्जी का यहां ब्यौरा नाम, पता व मोबाइल नंबर के साथ रजिस्टर में दर्ज किया जाता है।

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मंदिर से जुड़ी आस्था है कि जब इसके निर्माण की तैयारी चल रही थी तब प्रारंभ में मंदिर को भूमि तल से 5-6 फीट ऊपर उठाकर बनाने का निर्णय लिया गया। पर जब मंदिर निर्माण के लिए खुदाई शुरू हुई तो 4 फीट नीचे भगवान श्रीसिद्ध गणेश की लगभग ढाई फीट उंची प्रतिमा मिली। मंदिर निर्माण के बाद, इसी प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया।

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ऐसे होती है मनोकामना पूरी

इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पर्ची पर लिखकर एक नरियल सहित मंदिर में अर्पित कर देते हैं। मंदिर प्रबंधन द्वारा पर्ची पर लिखी मनोकामना को एक रजिस्टर में व्यक्ति के नाम और पते के साथ लिख लिया जाता है। इसके बाद पर्ची और नारियल गणेश जी के सामने रखा जाता है। माना जाता है कि पर्ची पर लिखी मनोकामना गणेश जी पूरी करते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद लोग आकर अपनी मन्नत के अनुसार गणेश जी की विशेष पूजा अर्चना करते हैं।

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अब 1 लाख 80 हजार अर्जियां लग चुकी है

श्रीसिद्ध गणेश मंदिर के व्यवस्थापक रामानुज तिवारी ने बताया कि कई बाधाओं के बीच इस मंदिर का निर्माण हुआ है। इसके लिए भी भगवान से अर्जी लगाई गई थी। तब से यह मंदिर अर्जी वाले गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां अर्जी लगाने वाले नारियल के साथ आते हैं। अर्जी बकायदा रजिस्टर में दर्ज की जाती है। अब तक 1.80 लाख लोग अर्जी लगा चुके हैं। 60 हजार लोगों की अब तक अर्जियां पूरी हुई हैं।

50 से ज्यादा रजिस्टर बनाए गए, नंबर लगते हैं

रामानुज तिवारी के मुताबिक मंदिर में अर्जी लगाने वालों का पूरा लेखा-जोखा रखा जाता है। इसके लिए 50 से ज्यादा रजिस्टर भी बनाए गए हैं। इस रजिस्टर में संबंधित व्यक्ति का ब्यौरा दर्ज किया जाता है, साथ ही उसे नम्बर भी आवंटित किया जाता है। नारियल पर नंबर दर्ज कर उसे संबंधित व्यक्ति की मनोकामना के साथ भगवान गणेश के दरबार में रख दिया जाता है।

नंबरों के चलते मंदिर प्रबंधन के पास उन सभी लोगों का पूरा ब्यौरा मौजूद है, जो यहां आकर अर्जी लगाते हैं। इसके अलावा गणेश के दरबार में आने वाले नारियलों को व्यवस्थित तरीके से रखा गया है। श्रद्धालु बताते हैं कि जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब वे मंदिर में विशेष पूजा अर्चना कर भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

दस दिन विशेष अनुष्ठान

इस मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान चतुर्थी तिथि से लेकर अनंत चौदस तक विशेष पूजन अनुष्ठान होते हैं। दस दिनों तक भगवान का अलग-अलग शृंगार व सहस्त्रार्चन किया जाता है। जिसके लिए लोग कतार में रहते हैं, किंतु किसी एक को ही अनुष्ठान करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

               इस तरह नारियल के साथ मनोकामना पर्ची में लिखकर चढ़ाया जाता है .

मंदिर की खास-खास बातें

26 नवंबर 2001 में कार्तिक शुक्ल एकादशी को मंदिर का निर्माण शुरू

10 सितंबर 2002 गणेश जन्मोत्सव भाद्र शुक्ल चतुर्थी को जयपुर से मूर्ति लाकर स्थापित की गई।

मंदिर में बीमारी, नौकरी, परिवार परेशानियों की अर्जियां विशेष रूप से लगाई जाती है।

मंदिर में पीपल पेड़ से निकली जड़ों से गणेश आकार की प्रतिमा भी स्थापित है।

गणेश प्रतिमा के पीछे वह मूर्ति स्थापित है जो जमीन से प्रकट हुई थी।

रामलला मंदिर के संस्थापक स्वामी रामनिरंजनाचार्य के पुत्र स्वामी रामबहादुर के प्रयासों से मंदिर का निर्माण हुआ।

अर्जी पूरी होने के बाद लोग हवन-पूजन के साथ भंडारा कराने पहुंचते हैं।

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