REWA : UPSC एक्जाम में 44वीं रैक हासिल : IFS अधिकारी बने बीरेंद्र पटेल, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर

रीवा. मन में दृढ़ निश्चय व समपर्ण का भाव हो तो मुश्किल काम भी असान हो जाते हैं। यह कहना है कि यूपीएससी एक्जाम में 44वीं रैक हासिल कर आइएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारी बने बीरेंद्र कुमार पटेल का। बीरेंद्र रीवा जिले के बंधवा-कोठार निवासी हैं। आठवीं तक की पढ़ाई गांव की सरकारी स्कूल से ही की है। इसके बाद रीवा की मॉडल स्कूल से इंटर और इंजीनियरिंग इंदौर एसएसजी कॉलेज से की। इंदौर में पढ़ाई के दौरान उन्हें माइक्रोसाफ्ट जैसी नामी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब ऑफर हुए, लेकिन सपना सिविल सर्विस था। इसके लिए वह लगातार प्रयास करते रहे।

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आठ बार असफल हुए, लेकिन हार नहीं मानी। आज भी वह अपने आइएएस के सपने को लेकर अडिग हैं। पत्रिका से चर्चा के दौरान बताया कि आज के डिजिटल युग में कुछ भी असंभव नहीं है। न करने के तमाम बहाने मिल जाएंगे, लेकिन यदि सच्चे मन व पूरे सपर्मण भाव से मेहतत करते रहेंगे तो यूपीएससी क्‍या जीवन की कोई भी परीक्षा पास करना मुश्किल नहीं है। मैंने इंटर के दौरान आइएएस बनने की ठानी थी। तभी से तैयारी शुरू कर दी। कई बार असफल हुआ तो कई बार बेहतर जॉब भी ऑफर हुए, लेकिन लक्ष्य से नहीं डिगा। हर असफलता से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की और दोगुनी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा।

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ट्रेनिंग के दौरान भी करेंगे तैयारी

बीरेंद्र ने नवंबर-2021 में यूपीएससी क्लियर किया था। ऑल इंडिया स्तर पर उन्हें 44वीं रैंक मिली। तीन माह की बेसिक ट्रेनिंग के बाद मप्र कैडर

अलाट हुआ है। अब वह आइएफएस की ट्रेनिंग के लिए देहरादून जाएंगे। लेकिन, ट्रेनिंग के दौरान भी उनकी आइएएस की तैयारी जारी रहेगी।

बिना कोचिंग के भी संभव

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे युवाओं को संदेश देते हुए बीरेंद्र ने कहा, लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने कठिन मेहनत करें। गांव से हैं या शहर से बहुत मायने नहीं रखता। बिना कोचिंग के भी लोग यूपीएससी पास कर रहे हैं। इसलिए अपने आपको कमतर न आंके। जीवन में हर तरह के लोग मिलेंगे, किससे क्या सीखना है और क्या निगलेक्ट करना है, यह आपको तय करना है। इसी तरह पढ़ने के लिए भी बहुत कुछ है, लेकिन क्या पढ़ना है, क्या नहीं पढ़ना पहले यह तय करना होगा। मैंने किताबों को हमेशा प्रिफर किया है। सोशल मीडिया से खासकर, फेसबुक, वाट्सएप से दूरी बनाकर रखनी होगी। मन को अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रखने के लिए खेल व योग नियमित रूप से जरूरी हैं।

पढ़ाई से समझौता नहीं

गांव की सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर आएफएस बने बीरेंद्र होनहार छात्र थे। बताया कि घर-परिवार में कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। आर्थिक हालात भी बहुत ठीक नहीं थे। दो एकड़ खेत है, जिससे पिता गेंदलाल पटेल परिवार की परिवरिश करते थे, लेकिन बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। प्रदेश के बेस्ट कॉलेज से इंजीनियरिंग कराई। शुरुआती दौर में कोंचिंग के लिए दिल्‍ली भेजा। दो छोटे भाई हैं, वह भी इंदौर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

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