White tiger mohan : जानिए सफेद बाघ मोहन को रीवा रियासत के राजा शिकार के दौरान पकड़ने की कहानी शिवधारी की जुबानी 

 
सफेद बाघ मोहन की गुफा देखने आते हैं विदेशी पर्यटक

दुनियाभर में प्रसिद्ध सफेद बाघ मोहन को जानने के लिए देश ही नहीं विदेश पर्यटक भी आ रहे हैं।

White tiger mohan : दुनियाभर में प्रसिद्ध सफेद बाघ मोहन को जानने के लिए देश ही नहीं विदेश पर्यटक भी आ रहे हैं। संजय टाइगर रिजर्व में नाम मात्र के लिए ही बाघ थे, जब भी बड़ी संख्या में पर्यटक सिर्फ मोहन बाघ की यादों को ताजा करने के लिए यहां आए। पिछले पांच वर्षों में 38 विदेशी और 10 हजार के करीब भारत के कोने-कोने से पर्यटक आए। वर्ष 2018-19 में 23 विदेशी पर्यटक सफेद बाघ मोहन की गुफा (माद), पनखोरा गांव के पास बरगड़ी नाला को देखने आते हैं। इतना ही नहीं मोहन की कहानी को पर्यटकों के बीच अपने पिता के साथ चश्मदीद रहा बुजुर्ग शिवधारी बैगा की धुंधली आंख और कांपते होंठ और ताजा कर देते हैं। शिवधारी पर्यटकों को सफेद बाघ मोहन को रीवा रियासत के राजा शिकार के दौरान पकड़ने की कहानी सुनाता है।
संजय टाइगर रिजर्व में सफेद बाघ मोहन 27 मई 1951 से 04 जून 1951 तक रीवा महाराजा मार्तण्ड सिंह पनखोरा के जंगल में शिकार के लिए गए हुए थे। इस अभियान में 13 बाघ जिसमें 6 नर, 5 मादा व 2 शावकों के शिकार करने के बाद सफेद बाघ मोहन पकड़ा जा सका था। शिवधारी अपने पिता सुखदेव के साथ महाराज की मदद की थी। बाघ को गोविंदगढ़ किले में रखा गया। मनमोहन रूप की वजह से इसका नाम मोहन रखा गया।
दुनियाभर में सफेद बाघ मोहन का वंशज
सफेद बाघ का कुनबा यहीं से विश्वभर में फैला। महाराजा मार्तण्ड सिंह के किले से जन्मे बाघ ब्रिटेन, अमेरिका और जापान तक भेजे गए थे। 19 साल के जीवनकाल में मोहन और फीमेल टाइगर राधा के कुल 34 शावक हुए, जिसमें से 21 सफेद रंग के थे।
क्या कहते हैं वन्यजीव विशेषज्ञ
जयराज सिंह परिहार वन्यजीव विशेषज्ञ कहते हैं कि चार जून 1951 को पनखोरा गांव के पास बरगड़ी नाले में एक गुफा में सफेद बाघ मिला था, जो बस्तुआ रेंज में आता है, पर्यटकों के मन में इस जगह को जानने और देखने की लालसा उन्हें इस जगह खींच ले आती है। दुनिया में जो भी सफेद बाघ हैं, वो सभी मोहन के ही वंशज है। इस जगह कई देसी विदेशी पर्यटकों का आना होता रहता है। शिवधारी बैगा ही अब एक मात्र जीवित गवाह है मोहन का।
पिछले 5 वर्ष ने पर्यटकों का आंकड़ा
वर्ष भारतीय विदेशी
2017-18 210 05
2018-19 1350 23
2019-20 1603 02
2020-21 2955 05
2021-22 2834 03
(नोट- संजय टाइगर रिजर्व प्राप्त आंकड़ा)
आज भी जानना चाहते हैं मोहन को
संजय टाइगर रिजर्व में पिछले पांच वर्षों में 38 विदेशी और करीब 10 हजार भारत के कोने-कोने से पर्यटक आए हैं। बाघों की संख्या कम थी, तभी विदेशी पर्यटक सर्वाधिक आए। पर्यटक सफेद बाघ मोहन के रहवास और उसके बारे में आज भी जानने की इच्छा रखते हैं। -वाईपी सिंह सीसीएफ संजय टाइगर रिजर्व सीधी

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