REWA : विंध्य की अनमोल धरोहर के साथ सुनियोजित खिलवाड़ फिर सुखियों में : नवागत कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश


ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। एक बार फिर प्रशासनिक संज्ञान लिए जाने के कारण विंध्य प्रदेश के पहले शैक्षणिक संस्थान शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय के स्थापना वर्ष का मामला सुखियों में आ गया है। संभागायुक्त कार्यालय से जारी किए गए निर्देश पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर इलैया टी राजा ने अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग डॉ पंकज श्रीवास्तव को नये सिरे से शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय के स्थापना वर्ष की जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके पूर्व रीवा कलेक्टर रहे बसंत कुर्रे ने तत्कालीन संभागायुक्त डॉ अशोक भार्गव की समझाइश और लोकल सियासतदारों के दबाव में आकर टीआरएस कालेज के स्थापना वर्ष को और अधिक विवादित कर दिया। 


टीआरएस कालेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ रामलला शुक्ल को दोषी ठहराते हुए बिना देखे ही संभागायुक्त कार्यालय से तत्कालीन कलेक्टर के संदिग्ध जांच प्रतिवेदन को आवश्यक कार्रवाई के लिए आयुक्त उच्च शिक्षा मुकेश शुक्ला भोपाल भेज दिया। लेकिन सच्चाई पर कालिख पोतने वाला जांच प्रतिवेदन सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया। रीवा रियासत के महाराजा और पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जिला प्रशासन पर विंध्य के इतिहास से सुनियोजित छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। 


पूर्व मंत्री ने रीवा गजेटियर की कापी मीडिया को उपलब्ध कराते हुए सियासतदारों के गंदे खेल को उजागर किया था। इसके साथ ही टीआरएस कालेज के पुरा छात्र परिषद के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह, सिरमौर विधायक दिव्य राज सिंह, राष्ट्रीय बाह्मण समाज और संघ सहित एबीवीपी ने विंध्य के इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप जिला प्रशासन पर लगाया। यही वजह है कि सियासतदारों के आगे घुटने टेकने वाले तत्कालीन संभागायुक्त डॉ अशोक भार्गव ने तबादला होने के बाद रीवा से रवाना होने के पहले ही रीवा के नवागत कलेक्टर को पत्र लिखकर पुनः जांच करने के लिए निर्देशित कर दिया। 


कलेक्टर इलैया टी राजा का फरमान मिलते ही अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ने नये सिरे से जांच कराने के लिए तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया है जिसमें शासकीय कन्या महाविद्यालय रीवा से डा महेन्द्र मणि द्विवेदी, शासकीय मनगवां कालेज से प्रो कमलेश सिंह और टीआरएस कॉलेज से सुशील दुबे हैं, यह टीम जब जांच प्रतिवेदन अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा को सौंपेंगी तब तत्काल एडी आफिस से कलेक्टर इलैया टी राजा को अभिमत के साथ जांच प्रतिवेदन भेजा जाएगा। 


रीवा गजेटियर में 1869, प्रशासन ने कूड़ेदान में फेंका

विंध्य की सियासत को अपनी जागीर समझने वाले बिजनेस माइंड लीडर को जब यह सूचना मिली कि शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने संभागायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है तो तत्काल पूरे मामले को हाईजैक कर लिया गया। शिकायत में कहा गया है कि टीआरएस कालेज के प्राचार्य डॉ रामलला शुक्ल आयोजन के नाम पर खिलवाड़ कर रहे हैं। अपने राजनैतिक प्यादे के प्रति बिजनेस माइंड लीडर का उतावलापन किसी से छिपा नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में भी प्यादे की राह आसान रखने के लिए सूचना मिलते ही राजनैतिक आका ने तत्काल पावर का दम दिखाना शुरू कर दिया। 


तत्कालीन संभागायुक्त डॉ अशोक भार्गव पर राजनैतिक दबाव बनाते हुए रीवा के तत्कालीन कलेक्टर बसंत कुर्रे को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। आवश्यक दस्तावेजों के साथ साथ रीवा रियासत का वह गजेटियर उपलब्ध करवाया है जिसमें पहले शैक्षणिक संस्थान का उदय सन् 1869 में एक पब्लिक स्कूल के तौर पर हुआ था। फिर धीरे-धीरे इस संस्था का विकास आगे बढ़ने लगा। तत्कालीन कलेक्टर बसंत कुर्रे ने रीवा गजेटियर जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज को मानने से साफ तौर पर इंकार कर दिया था। संदिग्ध जांच प्रतिवेदन बनाकर तत्कालीन कलेक्टर बसंत कुर्रे ने जांच प्रतिवेदन संभागायुक्त कार्यालय भिजवा दिया जिसे बिना देखे आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए भिजवा दिया। 


जब टीआरएस कालेज के स्थापना वर्ष के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने रीवा स्टेट के गजेटियर को मानने से जब इंकार कर दिया तो रीवा रियासत के महाराजा और पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह सामने आ गये। प्रेस कांफ्रेंस में जिला प्रशासन पर इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप पूर्व मंत्री ने लगाया। इसके बाद राष्ट्रीय बाह्मण समाज, एबीवीपी के जिला संयोजक भास्कर मिश्रा, टीआरएस कालेज के पुरा छात्र परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता घनश्याम सिंह ने दस्तावेजों के साथ तत्कालीन कलेक्टर और संभागायुक्त पर सियासतदारों के दबाव में विंध्य क्षेत्र की अनमोल धरोहर में शामिल टीआरएस कालेज के स्थापना दिवस से खिलवाड़ किया है।


एडी की अनुमति बाद आयुक्त-कलेक्टर को भेजी सूचना

पिछले सोलह साल से विंध्य की सियासत का केंद्र बिजनेसमैन लीडर बने हुए हैं। राजनैतिक पावर के सहारे जानबूझकर विंध्य क्षेत्र के पहले शैक्षणिक संस्थान शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय के स्थापना वर्ष को विवादित करवा दिया गया। बिजनेस माइंड लीडर ने अपने सबसे खास राजनैतिक प्यादे की राह में आने वाली भविष्य की रुकावट को दूर करने के लिए ही ऐतिहासिक धरोहर टीआरएस कालेज को सुनियोजित तरीके से निशाने पर लिया सियासतदारों ने लेते हुए अपने मंसूबों को पूरा करने का प्रयास किया। 

शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति ने दिसंबर 2019 में आयोजित बैठक में विचार मंथन के बाद स्थापना दिवस के 150 वर्ष सेलिब्रेट करने का निर्णय लिया। इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कराने का अधिकार मध्य प्रदेश शासन ने जनभागीदारी समिति को सौंप रखे हैं। रीवा गजेटियर में पहले शैक्षणिक संस्थान की स्थापना सन् 1869 में लिखा हुआ है, इसी आधार पर जनभागीदारी समिति ने 150 वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित कराने का फैसला किया। 

जनभागीदारी समिति के लिए गए निर्णय पर कालेज प्रबंधन आवश्यक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होता है। टीआरएस कालेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ रामलला शुक्ल ने जनभागीदारी समिति के निर्णय से अवगत कराते हुए अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ पंकज श्रीवास्तव से अनुमति हासिल कर ली। इसके बाद ही आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग और रीवा के तत्कालीन कलेक्टर बसंत कुर्रे को पत्र के माध्यम से टीआरएस कालेज के प्रबंधन ने अवगत कराया। इस हकीकत के साक्ष्य टीआरएस कालेज में रखे हुए हैं।

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