MP : इस शहर के कई होटल देह व्यापार के आसरे, पैसे देने पर मिलती है हर सुविधा


उज्जैन। सिंहस्थ 2016 के पहले नानाखेड़ा क्षेत्र से लेकर इंदौर रोड तक कई नई होटलें खोली गई थी। सिंहस्थ बाद ज्यादातर होटलों में यात्री कम रूकते हैं। संभवत: इसी के चलते नानाखेड़ा सहित कुछ और क्षेत्रों की होटलें देह व्यापार के आसरे चल रही हैं।


बीते रोज आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक पंकज जैन को पुलिस की टीम ने इंदौर रोड स्थित होटल मधुवन से हिरासत में लिया था। पुलिस के मुताबिक नीलगंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने पंकज जैन के खिलाफ यौन शोषण करने संबंधित शिकायती आवेदन दिया था। पीड़िता उपनिरीक्षक के घर में साफ‑सफाई का काम करती थी। पुलिस के अनुसार वह किशोरी के साथ पिछले 11 महीने से अलग-अलग होटलों में ले जाकर दुष्कर्म कर रहा था तथा इसका वह वीडियो भी बना था और पीड़िता को धमकाया करता था। हालांकि पुलिस पूरी प्लानिंग के साथ उक्त होटल में पहुँची थी तथा पंकज जैन को होटल के कमरे से हिरासत में लिया था उस दौरान पीडि़ता भी वहीं पाई गई थी। जिसके बाद मप्र की शिवराज सरकार ने संबंधित अधिकारी को तत्काल बर्खास्त कर दिया।



इस घटना के बाद होटल के अलावा नानाखेड़ा बस स्टैण्ड के आसपास बने कई होटल भी चर्चा में आ गए है। लॉकडाउन के दौरान अन्य व्यवसायों की तरह होटल का धंधा भी मंदा ही रहा था। नानाखेड़ा क्षेत्र में विशेषकर कोरोना संक्रमण के बाद से अभी बसों का संचालन भी नहीं हो रहा है तथा इसके पहले वहां ट्रेनों से यात्री भी नहीं पहुँचते, इस कारण इस क्षेत्र की कई होटलों में इस तरह के अनैतिक व्यवसाय चलाये जाते हैं। यहां इंदौर तथा आसपास के जिलों से कई संदिग्ध जोड़े आकर आए दिन में रूकते हैं तथा दो घंटे ठहरकर पूरे समय का किराया चुकाकर जाते हैं। इस तरह का गोरखधंधा छोटे होटलों में ज्यादा चल रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि पुलिस को भी ऐसे इलाकों की होटलों पर निगरानी रखनी चाहिए तथा वहाँ की गतिविधियों को समय-समय पर जाँचते रहना चाहिए।


वहीं क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यहां पिछले काफी समय से इस तरह की गतिविधियां संचालित होती आ रही है। पुलिस इसको लेकर किसी भी तरह से संजीदा नहीं है। अगर पुलिस यहां गंभीरता से कार्रवाई करें तो आए दिन कई बड़े खुलासे हो। इन होटलों को शहर के कई बड़े सफेदपोशों का भी संरक्षण मिल रखा है। ऐसे में पुलिस किसी भी तरह की कार्रवाई करने से गुरेज करती है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इनमें से कुछ होटल तो ऐसे भी है जहां अगर आपके पास पैसा है तो आपके लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध करा दी जाती है। मजे की बात है कि यह सब काम यहां रात के अंधेरे में नहीं होता है बल्कि पूरे दिन में। यहां रुकने वाले लोगों से न तो किसी भी तरह का पहचान पत्र मांगा जाता है और न ही अन्य जरूरी दस्तावेज। सारा खेल कुछ कोडवर्ड पर चलता है। एक दो बार आने के बाद होटल संचालक व उनके कर्मचारी स्वयं पहचान जाते हैं और किसी कागजी कार्रवाई के बगैर कमरा उपलब्ध करा दिया जाता है।


होटल वालों के लिए फायदे का सौदा
इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त यहां आने वाले ज्यादा जोड़े महज दो से तीन घंटे के लिए कमरा लेते हैं। जबकि किराया पूरे दिनभर का देते हैं। ऐसे में अगर इस तरह के तीन से चार ग्राहक भी दिन के आ गए तो होटल संचालकों की चौगुनी कमाई हो जाती है। यहीं कारण है कि होटल संचालक इस तरह के धंधे को पूरी शह देते हैं।


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