REWA : शहर के वार्डों का तय हुआ आरक्षण : जानिए अपने क्षेत्र की स्थिति


रीवा। नगर निगम के सभी वार्डों के पार्षदों का निर्वाचन कराने के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। कलेक्ट्रेट वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया हुई, जहां पर संबंधित वार्डों के जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी इलैयाराजा टी तथा आयुक्त नगर निगम मृणाल मीणा सहित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में वार्डों का आरक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में कई वार्ड आरक्षित हो गए हैं, जिसके चलते लगातार वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई दिग्गज पार्षदों के रास्ते बंद हो गए हैं।


उन्हें अब पार्षद बनने के लिए शहर के दूसरे वार्ड तलाशने होंगे। आरक्षण की कार्यवाही मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 तथा मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं के लिए वार्डों के आरक्षण नियम 1994 के तहत संपन्न कराई गई। कई वार्डों के आरक्षण से जुड़ी घोषणा होने पर उनसे दावेदारी कर रहे लोगों के चेहरे खिल गए तो कई मायूस होकर घर के लिए निकले।


वार्डों का आरक्षण इस प्रकार हुआ


अनुसूचित जाति वर्ग - वार्ड 28, वार्ड 38, अजा(महिला) वार्ड 39 तथा वार्ड 40 आरक्षित।
अनुसूचित जनजाति- वार्ड 4 तथा अजा(महिला) वार्ड 1 आरक्षित।
अन्य पिछड़ावर्ग -- वार्ड 16, वार्ड 18, वार्ड 36, वार्ड 20 तथा वार्ड 35
पिछड़ा वर्ग महिला-- 32, वार्ड 41, वार्ड 3, वार्ड 12, वार्ड 29, वार्ड 8 आदि।

अनारक्षित महिला- वार्ड 2, वार्ड 7, वार्ड 9, वार्ड 11, वार्ड 15, वार्ड 17, वार्ड 22, वार्ड 23, वार्ड 25, वार्ड 30, वार्ड 31, वार्ड 43, वार्ड 44, वार्ड 37 आदि।

अनारक्षित-- (ओपन फार आल) के लिए वार्ड 5, वार्ड 6, वार्ड
10, वार्ड 13, वार्ड 14, वार्ड 19, वार्ड 21, वार्ड 24, वार्ड 26, वार्ड 27, वार्ड 33, वार्ड 34, वार्ड 42, वार्ड 45 आदि। 


इन नेताओं को दूसरे वार्ड में तलाशना होगा मैदान
नगर निगम की परिषद में लंबे समय से जनता का नेतृत्व कर रहे कई ऐसे वरिष्ठ पार्षद हैं जिनके पूर्व के वार्ड आरक्षित घोषित कर दिए गए हैं, जिसकी वजह से वह इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। निगम परिषद में पहुंचने के लिए उन्हें शहर के दूसरे वार्डों में जाना होगा। इन नेताओं में प्रमुख रूप से भाजपा के वरिष्ठ पार्षद और निगम के स्पीकर सतीश सोनी, निगम में नेता प्रतिपक्ष रहे अजय बाबा, प्रभारी महापौर रहे वेंकटेश पाण्डेय, एमआइसी मेंबर नीरज पटेल, शिवदत्त पाण्डेय, सतीश सिंह, मनीष श्रीवास्तव, कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद सज्जन पटेल, अशोक पटेल आदि के वार्ड अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं। इस वजह से यदि पार्षद बनना है तो इन्हें दूसरे वार्ड जाना होगा। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद गोविंद शुक्ला, रामप्रकाश तिवारी डैडू, विनोद शर्मा, भाजपा की वंदना सिंह और माकपा के रमाकांत पाण्डेय के वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो गए हैं। वहीं लेखा समिति की अध्यक्ष रूपा जायसवाल का वार्ड अनारक्षित हो गया है, जिसमें उनके पति राजकुमार जायसवाल भी दावेदारी कर रहे हैं।





वार्डों का परिसीमन नहीं कराने पर दर्ज कराई आपत्ति
शहर के कई वार्डों के क्षेत्रफल और जनसंख्या के अनुपात में विसंगतियां हैं। इसको लेकर वार्डों के पार्षदों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गई और कहा गया कि पहले इन वार्डों का परिसीमन कराया जाए, इसके बाद आरक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाए। इस पर कलेक्टर ने कहा कि परिसीमन की मांगें उनकी जायज हैं लेकिन आरक्षण की प्रक्रिया ३१ जुलाई के पहले करने का शासन का निर्देश है। इस वजह से अभी कोई बदलाव नहीं होगा। इस पर वार्ड १२ के पार्षद विनोद शर्मा और वार्ड ४४ के नीरज पटेल ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए आरक्षण की प्रक्रिया से बहिर्गमन किया। इनकी ओर से कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया है जिसमें वार्डों की वर्तमान जनसंख्या और क्षेत्रफल का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। 


इसमें वार्ड छह के धनेन्द्र सिंह, वार्ड 23 के मोहम्मद अकरम, वार्ड आठ के रमाकांत पाण्डेय, वार्ड 15 के अशोक पटेल, वार्ड 15 की रूपा जायसवाल आदि के भी हस्ताक्षर हैं। शहर के बाजार क्षेत्र के वार्डों के पार्षद इस पर खामोश रहे, क्योंकि वहां पर कम वोट पाकर भी पार्षद बन जाते हैं और बड़े क्षेत्रफल और जनसंख्या वाले वार्डों में अधिक मशक्कत करनी पड़ती है। परिसीमन की मांग कर रहे विनोद शर्मा ने कहा कि उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए वार्डों में एकरूपता की मांग उठाई है। जिस पर सैद्धांतिक रूप से कलेक्टर भी सहमत हैं लेकिन शासन के आदेश की समयसीमा का हवाला देकर परिसीमन से फिलहाल इंकार किया है।


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