REWA : बड़ी खबर : खुदखुशी करने वाले मृत शिक्षक की पत्नी को मिली अनुकंपा नियुक्ति : DEO ने जारी किया आदेश


ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। गंगेव विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक शाला देवगांव में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक संजीव शुक्ला ने 3 माह की वेतन ना मिलने से डिप्रेशन में आकर आत्मघाती कदम उठाते हुये हाई डोज नींद की गोलियों का सेवन कर किया था जिससे संजय गांधी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी। 


उनकी मृत्यु से जहां पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया था वही बच्चो के सर से सहारा भी छिन गया था । इस पूरे मामले में विकास खंड कार्यालय में पदस्थ लिपिक को दोषी मानकर स्थानांतरित कर दिया गया था। जिस पर अध्यापक के विभिन्न संगठन में आपत्ति दर्ज कराई थी। और पीड़ित परिवार को न्याय के साथ ही तत्काल अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। जिस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रीवा राम नरेश पटेल ने नियमानुसार मृतक की पत्नी श्रीमती अर्चना शुक्ला को भृत्य के पद अनुकंपा नियुक्ति करते हुए शा. हाईस्कूल सुरसा में  पदस्थ करने का आदेश जारी किया।


आत्मघाती कदम की ये थी वजह 

गंगेव विकासखंड में शिक्षकों का तीन माह का वेतन नहीं दिया गया था, जिसके चलते अब उन्हें आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ . गंगेव विकासखंड के गोदरी स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक ने तीन माह की वेतन नहीं मिलने के कारण आत्महत्या कर ली. दरअसल वेतनमान पे की ग्रेडिंग में तकनीकी समस्या होने के चलते तीन माह का वेतन गंगेव विकासखंड के किसी भी शिक्षक को नहीं दिया गया था। 


इस बात से आहत शिक्षिक संजीव शुक्ला मानसिक रूप से परेशान रहने लगे और एक नींद की गोलियां खा लीं, जिसके कारण अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई और आनन-फानन में उन्हें संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
 

जहां पर इलाज के दौरान आज उनकी मौत हो गई। बिना पंचनामा के अंतिम संस्कार इधर शिक्षक की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन भी लापरवाही करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और उनकी डेड बॉडी को बिना पीएम कराए ही परिजनों को सौंप दिया गया. बताया जा रहा है कि शिक्षक के शव को अस्पताल से घर ले जाने तक के लिए परिजन के पास पैसे नहीं थे, जिसके बाद सहयोगियों की सहायता से शव को अस्पताल से रवाना कराया गया. जिसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया और अब बिना पीएम कराए परिजन को शव सौंपे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा था। जहाँ कलेक्टर ने तुरंत ही संबंधित अधिकारियों को शव का पंचनामा कराने की जिम्मेदारी सौंपी लेकिन, जब तक काफी देर हो चुकी थी. शिक्षक का अंतिम संस्कार हो चुका था.


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