REWA : केन्द्रों में उत्तरपुस्तिकाएं जमा कराने सोशल डिस्टेंसिंग हुई तार-तार : व्यवस्था न होने पर छात्रों को हुई परेशानी : नहीं किए गए ठोस इंतजाम



रीवा। कोरोना संक्रमण से छात्रों को बचाने के लिए करीब छह महीने तक परीक्षा को लेकर मंथन चला। आखिरकार ओपन बुक प्रणाली से परीक्षा कराई गई और घरों पर ही उत्तरपुस्तिकाएं लिखने के लिए कहा गया। स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र केन्द्रों में उत्तरपुस्तिकाएं जमा करने पहुंचे तो भीड़ ही भीड़ पूरे परिसर में नजर आई।


यह भीड़ किसी एक परिसर विशेष तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर प्रमुख कालेजों का दृश्य एक तरह का ही देखा गया। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराने के लिए रखी गई शर्तें हाशिए पर रहीं। कालेजों में प्रवेश समय पर नहीं दिए जाने की वजह से भीड़ बढ़ती गई। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियम पूरी तरह से तार-तार होते रहे।


कई छात्रों की ओर से इस पर आपत्तियां भी दर्ज की गई लेकिन उनकी बातों को नजरंदाज किया गया। सबसे अधिक भीड़ मॉडल साइंस कालेज और शासकीय कन्या महाविद्यालय में देखी गई। यहां पर छात्रों को प्रवेश के लिए एक ही गेट था, जहां से काफी कम संख्या में एक-एक कर प्रवेश दिए गए। देखते ही देखते गेट पर भीड़ जमा होती गई, जिससे अव्यवस्था भी फैलने लगी।


माडल साइंस कालेज में कुछ छात्रों ने नारेबाजी भी शुरू कर दी थी जिसके चलते सभी को प्रवेश दिया गया और जहां पर कक्ष में उत्तर पुस्तिकाएं ली जा रही थी, वहीं पर लाइन लगवाई गई। जिससे गेट पर जमा भीड़ दोपहर दो बजे के बाद पूरी तरह से हट गई। कक्षाओं के पास जरूर लंबी लाइनें होने की वजह से काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी।


दूसरे सेंटरों की कापियां जमा कराने में समस्या
ओपन बुक प्रणाली परीक्षा की गाइडलाइन घोषित करते ही सरकार ने स्पष्ट किया था कि लॉकडाउन के चलते यदि छात्र अपने कालेज क्षेत्र से दूर कहीं हैं तो वह उत्तर पुस्तिकाएं घर पर लिखने के बाद वहीं पर जमा करा दें। इसके बाद विश्वविद्यालय ने भी कई बार इस पर कहा था कि उत्तर पुस्तिका जमा कराने के लिए छात्रों को किसी तरह से परेशानी नहीं हो, इसके लिए विश्वविद्यालय क्षेत्र का कहीं से भी छात्र आए उसकी उत्तरपुस्तिका ली जाए।


इस पर छात्रों को भटकाने का काम कई जगह किया जाता रहा। मॉडल साइंस कालेज में प्राचार्य डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया था कि दूसरे केन्द्रों के छात्रों की भी विषयवार उत्तरपुस्तिकाएं ली जाएं। इसके बाद भी कुछ प्राध्यापकों ने वापस लौटा दिया। प्राचार्य की गैर मौजूदगी में प्रो. सुमन सिंह ने भी कहा कि किसी को वापस नहीं लौटाया जाए लेकिन कई प्राध्यापक ऐसे रहे जिन्होंने किसी की नहीं सुनी।
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