हाथरस कांड : बड़ा खुलासा, घूंघट के अंदर थी नकली ‘भाभी’, दंगा भड़काने वाली महिला की असलियत जान दहला देश


जबलपुर। उत्तरप्रदेश के बहुचर्चित हाथरस कांड की जांच कर एसआईटी की पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि दंगा भड़काने की साजिस में जबलपुर की रहने वाली एक महिला भी शामिल है। षडयंत्र में शामिल रही महिला का नाम गोपनीय रख यूपी एसआईटी की टीम कई स्थानों में छापामार कार्रवाई कर उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है। जबलपुर से मंडला क्षेत्र तक उक्त संदेही पीएचडी महिला की तलाश की जा रही है।


मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी में गृह सचिव भगवान स्वरूप के अलावा डीआईजी चंद्र प्रकाश और एसपी पूनम बतौर सदस्य शामिल हैं। एसआईटी की जांच में पीड़ित परिवार के सदस्यों की सीडीआर पड़ताल में महिला की डीटेल मिली है। टॉवर लोकेशन के आधार पर उक्त महिला पीड़ित परिवार के साथ करीब 7 दिनों तक रही पूरे मामले को अपने तरीके से हैंडल करती रही। शुरूआती पूछताछ में महिला ने अधिकारियों से बताया था कि वह पीड़िता की भाभी है। एसआईटी जांच में यह पता चला है कि पीड़िता के घर ठहरने वाली महिला से उनकी कोई रिश्तेदारी नहीं है।


हाथरस कांड के बहाने यूपी में जातीय दंगे कराने की साजिश, पीएफआई कनेक्शन और आरोपियों के पक्ष में गांव में हो रही लामबंदी की जांच एसआईटी कर रही है। प्रदेश सरकार ने इस केस में सीबीआई जांच की सिफारिश की है, लेकिन अभी तक गृह मंत्नालय की तरफ से स्वीकृति नहीं मिली है,12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में इस प्रकरण में सुनवाई होनी है. ऐसे में राज्य सरकार हाथरस कांड में जितना हो सकता है, सबूत इकट्ठे करना चाहती है,जिसके चलते महिला की गिरफ्तारी एसआईटी के लिए अहम है। मामले की गंभीरता और गोपनीयता को देखते हुए फिलहाल कोई भी अधिकारी इस संबंध में जुड़ी जांच प्रक्रिया की जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं।


यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र अंतर्गत 14 सितंबर को 19 वर्षीय युवती से कथित गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया था। 29 सितम्बर को पीड़िता की उपचार दौरान मौत हो गई थी। पुलिस-प्रशासन द्वारा पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार व जघन्य वारदात को लेकर मौके पर बवाल खड़ा हो गया था। इधर वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।


हाथरस के बूलगढ़ी गांव के इस केस के बहाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करने की योजना में एक और बड़ी साजिश सामने आ गई है। यहां पर पीएफआइ की मदद से बड़े दंगों की साजिश में भीम आर्मी के बाद अब नक्सल कनेक्शन भी पता चल गया है। अब एसआईटी की टीम मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली महिला की तलाश में जुटी है। पुलिस के मुताबिक यह फर्जी रिश्तेदार पीड़ित स्वजन को लगातार गाइड कर रही थी कि मीडिया में क्या बयान देना है।

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पुलिस का दावा है कि वह महिला पीड़ित परिवार को बरगला रही थी। पुलिस के मुताबिक तथाकथित रिश्तेदार (भाभी) डॉ. राजकुमारी पीड़ित परिवारों को बरगलाते हुए देखी गई है। केवल दलित होने के नाते परिवार के लोगों को भरोसे में लेकर पिछले कई दिनों से पीड़ित परिवार के यहां महिला रही थी। महिला अपने आप को मध्य प्रदेश के जबलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर बता रही थी।

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माना जा रहा है कि संदिग्ध नक्सली महिला पीड़िता के घर में भाभी बनकर रह रही थी। महिला अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाती है। इस महिला ने परिजनों को सरकार के विरोध में भड़काया। इतना ही नहीं खुद को पीड़ित परिवार का रिश्तेदार बताकर मीडिया में लगातार सरकार विरोधी बयान भी देती रही। फिलहाल अब वह सीन से गायब है और एसआइटी को उसकी जोरों से तलाश है।

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कोविड के बहाने चेहरा ढक कर परिवार वाला बन कर इसने कई चैनलों को इंटरव्यू दिया, इस दौरान महिला ने कई आपत्तिजनक, भड़काऊ और झूठी बातें कहीं थीं। महिला पर आरोप है कि उसने गांववालों में अफवाह फैलाकर उन्हेंं भी भड़काने का काम किया है। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो महिला घर से लापता हो गई, पुलिस महिला का सुराग लगाने में जुटी है।

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हाथरस केस की जांच कर रही एजेंसी को पता चला कि नक्सली महिला घूंघट में पुलिस और एसआईटी से बातचीत कर रही थी। वह 16 सितंबर से ही पीड़िता के गांव, यानी घटना के दो दिन बाद से ही सक्रिय हो गई थी। वह पीड़ित परिवार के साथ घर में रहकर वह परिवार के लोगों को रूप से भड़का रही थी। पीड़िता की भाभी बनकर रहने वाली नक्सली एक्टिविस्ट महिला की कॉल डिटेल्स में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। अब एसआइटी जल्द ही इसका खुलासा कर सकती है।

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एसआइटी की प्राथमिक जांच में जातीय हिंसा फैलाने के लिए विदेशी फंडिग की बात सामने आ चुकी है। यहां दंगा फैलाने की साजिश में भीम आर्मी का नाम भी आ चुका है। इस केस में फॉरेन फंडिंग के साथ-साथ नक्सली एंगल की एसआइटी और पुलिस की जांच के दायरे में हैं। अब पुलिस के शक होते ही महिला घर से चुपचाप खिसक ली। कई वीडियो में भी महिला को देखा जा सकता है जो अपना नाम कथित तौर राजकुमारी बता रही थी।

मृतका के घर रिश्तेदार बनकर रहे भीम आर्मी के लोग

भीम आर्मी हाथरस के बूलगढ़ी गांव में माहौल बिगाडऩे की साजिशकर्ता बनकर सामने आई है। पुलिस को इनपुट मिला है कि भीम आर्मी के तीन लोग पीड़िता के घर रिश्तेदार बनकर रह रहे थे। उन्होंने घर में रहकर परिजनों को सरकार के विरोध में भड़काया। इतना ही नहीं खुद को पीड़ित परिवार का रिश्तेदार बताकर भीम आर्मी के लोग मीडिया में लगातार सरकार विरोधी बयान भी देते रहे, जिसके चलते यह मुद्दा इतना बड़ा बन गया। भीम आर्मी के चंद्रशेखर बूलगढ़ी गांव की पीड़िता का हाल जानने 27 सितंबर को जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ पहुंचे थे। यहीं से भीम आर्मी के कार्यकर्ता युवती के स्वजन के संपर्क में आए। पीड़ित युवती की 29 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में मौत हो गई थी। इसकी सूचना पर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर भी सफदरजंग अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने युवती की मौत के बाद हंगामा किया था। आरोपितों को फांसी की सजा की मांग करते हुए रात तक हंगामा जारी रखा था। उसी दिन रात को पीड़िता का शव गांव लाया गया और पुलिस ने रात में ही उसका अंतिम संस्कार करा दिया।

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तभी से युवती के स्वजन के साथ भीम आर्मी से जुड़ी एक युवती व दो पुरुष रह रहे थे। यह खुद को रिश्तेदार बता रहे थे। यह लोग भी मीडिया को बयान दे रहे थे, जिनके निशाने पर प्रशासन और सरकार ज्यादा रही। भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर चार अक्टूबर को हाथरस आए थे। एसपी विनीत जयसवाल ने बताया कि भीम आर्मी के लोग जब पीड़िता से मिलने आए थे, तो एक युवती को यहां छोड़ गए थे, यह जानकारी खुफिया तंत्र से मिली थी। 


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