घर की अनबन से नाराज होकर बेटी 42 दिन से दूर : मां के पास आने के लिए पैसे नहीं

बयालीस दिन से एक बेटी अपने घर और स्वजन से दूर है। वजह है कि मां के पास इतने रुपये नहीं हैं कि वह गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से ग्वालियर आए और उसे वापस घर ले जा सके। इंतजार सिर्फ रुपये इकट्ठे होने का है। अभी यह बेटी ग्वालियर वन स्टॉप सेंटर में स्वजन को याद कर दिन काट रही है। गरीबी के इस सितम ने उसकी मां को भी बेचैन कर रखा है।

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गौरतलब है कि पांच अक्टूबर को रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर के पास यह युवती अकेली बैठी थी और उसके आसपास कई युवक मंडरा रहे थे। कोई बात करने का प्रयास कर रहा था तो कोई अपना मोबाइल नंबर उसे दे रहा था। इसी दौरान रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन की टीम की महिला सदस्य तबस्सुम खान अपनी साथी के साथ जागरूकता कार्यक्रम चला रही थीं। एक बुजुर्ग ने उन्हें बताया कि एक युवती परेशान है। टीम तत्काल वहां पहुंची और युवती को अपनी सुरक्षा में लेकर जीआरपी थाना पहुंची। युवती किसी ट्रेन से ग्वालियर आई थी।

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यहां पुलिस का निराशाजनक और असंवेदनशील रवैया देख चाइल्ड लाइन की टीम ने जिला प्रशासन से संपर्क किया और प्रशासन के दखल के बाद उसे जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) स्थित वन स्टॉप सेंटर भिजवाया गया। तब से युवती वहीं पर रह रही है। मां ने कहा- रिजर्वेशन के रुपये नहीं हैं वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड लाइन की काउंसलर को युवती से घरवालों का नंबर और पता मिला।

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युवती ने अपना पता डेयरी कॉलोनी, असुरन चौक के पास, टैंपो स्टैंड गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) बताया। मां का मोबाइल नंबर मिला तो बात होने पर मां ने कहा कि बेटी घर की अनबन में नाराज होकर चली गई है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, रिजर्वेशन के रुपये नहीं हैं। रुपये इकट्ठा होने पर जल्दी ही बेटी को लेने आएंगे। युवती के दिल्ली में रहने वाले मामा ने बताया कि सालों पहले उनके बहनोई का देहांत हो चुका है। अब परिवार में युवती, उसके दो भाई व मां हैं।

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युवती यहां वन स्टॉप सेंटर में रह रही है। परिवार ने बात करने पर बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण किराये तक के रुपये नहीं हैं। विभाग प्रयास कर रहा है कि युवती को सुरक्षित घर पहुंचाया जाए।

शालीन शर्मा, जिला महिला सशक्तीकरण अधिकारी, ग्वालियर

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