MP : कोविड सेंटर में मरीजों का इलाज करने वाले 36 साल के डॉक्टर की कोरोना से मौत

छिंदवाड़ा .सिंगोड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली बार कोविड सेंटर में कार्यरत डॉक्टर ने अपनी जान की परवाह करे बगैर जी-जान से मेहनत कर कोरोना से संक्रमित मरीजों की सेवा करने वाले 36 वर्षीय डॉक्टर रहमान की शुक्रवार की दरमियानी रात को कोरोना से लड़ते हुए मौत हो गई। हैरत की बात यह है कि पिछले चार महीने पहले ही डॉक्टर और इनकी पत्नी जिला अस्पताल में नियुक्त हुये थे। डॉक्टर के भाई सद्दाम ने बताया कि सिंगोड़ी स्वास्थ्य केंद्र में स्थित कोविड सेंटर में 28 मार्च को इनकी ज्वाईनिंग हुई थी।

पिता के इलाज के लिए अस्पताल में भटकती रही युवती, सोशल मीडिया की पहल पर युवती के पिता को मिला इलाज

वही दिनांक 9 अप्रैल के दिन खुद को सर्दी ज़ुखाम होने पर कोरोना जांच करवाया। अगली 14 अप्रैल को इनकी पॉजीटिव रिपोर्ट आयी। इसी के मद्देनजर स्वास्थ्य सुधार हेतु वह जिला अस्पताल में भर्ती हुए किंतु कोरोना महामारी से लड़ते लड़ते दिनांक 17 अप्रैल को इन्होंने दम तोड़ दिया जिससे परिवार वालो में बहुत शोक व्याप्त है एवं रो रो कर बुरा हाल है।

दिल्ली से छतरपुर के लिए निकले मजदूरों से भरी बस झांसी हाईवे पर पलटी, 52 सीटर बस में भरे थे 100 यात्री : 2 की मौत, 15 घायल

डॉक्टर के भाई का आरोप - डॉक्टर होने के बाद भी नहीं मिला आई सी यू में पलंग और न मिला ऑक्सीजन

इनके भाई ने डॉक्टर भाई की मौत की आपबीती सुनाते हुए बताया कि जिले के शासकीय अस्पताल में भाई और भाभी दोनों डॉक्टर है, बावजूद इसके इन्हें आईसीयू में पलंग तक नहीं मिला और न ही ऑक्सीजन जबकि डॉक्टर भाभी जिला अस्पताल में पदस्थ हैं।

शादी समारोह की अनुमति: 100 के ऑनलाइन चालान के साथ मिलेगी शादी की अनुमति, अब केवल 20 लोग हो सकेंगे विवाह में शामिल

डॉक्टर पत्नी ने सिविल सर्जन एवं कोविड अधिकारी सहित अन्य सह कर्मियों से मदद की गुहार लगाई परन्तु आमजनों की जान बचाने वाले को खुद की जान बचाने वाले नहीं मिले। इस प्रकार की लापरवाही की खबर जैसे जैसे बाहर आ रही है वैसे वैसे लोगों का जिला अस्पताल प्रबंधन के ऊपर गुस्सा बढ रहा है। अस्पतालों में लापरवाही बेहतासा चल रही है किंतु सुनने वाला कोई नहीं जिसका खामियाजा सबके सामने है।

प्रेमी से शादी करने अड़ गई नाबालिग लड़की ; माता-पिता ने रोका तो कहा - आज ही शादी करूंगी, मुझे कोई नहीं रोक सकता

दोनों डॉक्टर ने अपनी एक वर्ष बेटी को रखा था अपनो से दूर

दोनों पति पत्नी डॉक्टरों ने अपनी दस माह की बेटी को भोपाल में अकेला रख कर एक जिला अस्पताल में तो दूसरा सिंगोड़ी सरकारी अस्पताल में कोविड मरीजों की देख रेख कर उनकी सेवा कर रहे थे। मगर इन्हें क्या मालूम था कि इसी बीमारी की वजह से इनकी मौत हो जायेगी और दोष भी अपने सहकर्मी डॉक्टरों की लापरवाही के कंधो पर लगेगा शायद यह किसी को नहीं पता फिर भी जिला प्रशासन की आंखों पर क्यों पट्टी बंधी हुई है यह बात किसी को समझ में नही आ रही है। जिला प्रशासन और जिला अस्पताल में लापरवाही के चलते जिले के सभी विधानसभाओं के विधायक भी धरने पर बैठे हैं। उसके बाद भी सरकार का इस ओर जरा भी ध्यान नहीं है ।

Powered by Blogger.