MP : अजब गजब / 23 साल के युवक ने 1.50 लाख ठगने के लिए कलेक्टर-तहसीलदार के नाम से जारी किया नोटिस, फिर बरी होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया

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जबलपुर . मार्बल की दुकान में काम करने वाले 23 साल के युवक का कारनामा सुनकर दंग रह जाएंगे। हर्षद मेहता पर आधारित वेब सीरीज देखकर इस युवक ने गोहलपुर क्षेत्र के एक अस्पताल संचालक को ठगने का प्लान बनाया। उसने तहसीलदार के फर्जी सील-साइन कर नोटिस भेजा। फिर मामला सेटल करने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए मांगने लगा। यही नहीं, उसने बरी होने का जिला दंडाधिकारी के नाम की सील-साइन कर प्रमाण पत्र जारी कर दिया। आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है।

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सैफ नगर निवासी KGN हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर अब्दुल लतीफ के मुताबिक उनके यहां लकवा से संबंधित मरीजों का इलाज किया जाता है। नर्मदा नगर रद्दी चौकी में उनका अस्पताल है। नौ मार्च को उन्हें तहसीलदार न्यायालय से एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। इस नोटिस के जवाब के साथ 26 मार्च को पेश होने की बात लिखी हुई थी।

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साल 2020 में आर्थिक फ्रॉड पर आधारिक वेब सीरीज स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी रिलीज हुई थी। साल 1992 में देश का पहला फाइनेंशियल स्कैम जो करीब 4 हजार करोड़ रुपए का था, उसे हर्षद मेहता ने ही अंजाम दिया था। इस वेब सीरीज को देखने के बाद ही आरोपी को ठगी का आइडिया आया।

                     आरोपी ने इस तरह फर्जी नोटिस पत्र तैयार कर भेजा था।

10 मार्च को आरोपी का आया कॉल

10 मार्च को डॉक्टर अब्दुल लतीफ के पास 9691102280 से मोहित नाम बता कर कॉल आया। प्रकरण को समाप्त करने अधिकारियों काे पैसे देने की बात कही गई। दो लाख की मांग करने वाले मोहित ने डेढ़ लाख में मामला तय सेटल किया। डॉक्टर लतीफ 10 को ही तहसील कार्यालय गए तो पता चला कि वहां से कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है। दो जून को उसी प्रकरण का क्रमांक द्वितीय कारण बताओ नोटिस जारी हुआ।

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कॉल कर आरोपी ने कहा- पैसे नहीं दिए तो बर्बाद हो जाओगे

दूसरी नोटिस में 14 जून को पेश होने के लिए लिखा गया था। दो जून को उसके पास फिर उसी नंबर से फोन आया। कहा गया कि पैसे नहीं दिए तो बर्बाद कर दिए जाओगे। इस पर डॉक्टर लतीफ ने पैसे देने के लिए समय लिया। 14 जून को वे फिर तहसील कार्यालय गए तो वहां से बताया गया कि कोई नोटिस जारी नहीं हुई। दोनों नोटिस फर्जी हैं।

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आरोपी को पकड़ने डॉ. लतीफ ने बिछाया जाल

डॉ. लतीफ ने इसकी शिकायत गोहलपुर थाने में 14 को की। इसके बाद पुलिस के कहे अनुसार उन्होंने आरोपी से बात की। बोला कि वह पैसे दे देगा। उसका मामला सेटल करा दो। आरोपी जाल में फंस गया। उसने पैसे लेकर उन्हें तहसील कार्यालय के बाहर बुलाया। वहां डॉक्टर लतीफ कार से पहुंचे। आरोपी आया और उसी समय वहां मौजूद पुलिस वालों ने उसे दबोच लिया। मंगलवार की रात आरोपी के खिलाफ ठगी और अवैध वसूली का मामला गोहलपुर थाने में दर्ज किया गया।

                                    जिला दंडाधिकारी के नाम से जारी फर्जी बरी प्रमाण पत्र।

अधारताल का रहने वाला है युवक

पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी मकान नंबर 12/8 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी अधारताल निवासी मोहम्मद हमजा (23) पिता मोहम्मद नियाज निकला। पूछताछ में सामने आया कि वह भेड़ाघाट में एक मार्बल की दुकान में काम करता है। उसके पिता भी लकवा से ग्रसित हैं। छह महीने पहले उसका मकान बिक रहा था। इसी सिलसिले में डॉक्टर अब्दुल लतीफ उससे मिले थे। तभी से उसने उन्हें ठगने का प्लान बनाया था।

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सोशल मीडिया और वेब सीरीज देखकर आया विचार

सीएसपी गोहलपुर अखिलेश गौर के मुताबिक आरोपी मोहम्मद हमजा काफी शातिर है। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता है। क्राइम पेट्रोल, हर्षद मेहता की वेब सीरीज देखकर उसे ठगी का आइडिया आया। उसने कम्प्यूटराइज्ड नोटिस तहसीलदार न्यायालय की ओर से तैयार किया। वहीं जिला दंडाधिकारी की ओर से भी उसने इसी तरह से प्रमाण पत्र तैयार किया। सील-साइन उसने पुराने कागज से फोटोशॉप के माध्यम से पेस्ट कराया था। आरोपी को बुधवार 16 जून को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी में है। जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसने किसी और अस्पताल संचालक को तो नहीं ठगा है।

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