MP : एक श्रद्धालु दानदाता के गर्भ गृह की देहरी तक पहुंचकर दर्शन करने के मामले में मंदिर प्रशासन ने 2 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में कोरोना संक्रमण के कारण आम श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल अधिकृत पंडित, पुजारियों को ही पूजन के लिए प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में शनिवार को दानदाता एक श्रद्धालु के गर्भ गृह की देहरी तक पहुंचकर दर्शन करने के मामले में मंदिर प्रशासन ने 2 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। वहीं, एक पुजारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को सुबह करीब 11:30 बजे दानदाता रतलाम निवासी श्रद्धालु नैवेद द्वार से उतर कर सीधे गर्भ गृह के सामने देरी पर खड़े होकर दर्शन पूजन कर लिया। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर मंदिर के सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना देखने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद गर्भ गृह निरीक्षक अशोक ठूमरे और कर्मचारी अशोक कोरेकर को दोषी मानकर तत्काल सेवा से बर्खास्त करने के आदेश प्रभारी प्रशासक जितेंद्र सिंह चौहान ने दिए।

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वहीं इस मामले में मंदिर के पुजारी प्रदीप शर्मा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। श्रद्धालु प्रदीप पुजारी का जजमान था। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो महीनों से कलेक्टर के निर्देश पर मंदिर में आम श्रद्धालु का प्रवेश बंद है और जो श्रद्धालु गर्भ गृह तक पहुंचा था। उसके बारे में कहा जा रहा है कि उसके द्वारा मंदिर समिति को 31 हजार रुपए का रेफ्रिजरेटर दान में दिया है, इसीलिए श्रद्धालु को वहां तक पहुंचने में किसी ने नहीं रोका।

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पिछले साल सहायक प्रशासक को हटाया था

श्री महाकालेश्वर मंदिर में पिछले साल भी कोरोना के चलते श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया था। उस दौरान मंदिर में कार्यरत सहायक प्रशासक की मौजूदगी में कुछ लोगों ने नंदीहाल से दर्शन किए थे। मामला कलेक्टर तक पहुंचने के बाद तत्काल ही सहायक प्रशासक को मंदिर से हटाकर कोठी पर पदस्थ किया था।

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मंदिर में अधिकारी की मौजूदगी में कैसे पहुंचा श्रद्धालु

श्री महाकालेश्वर मंदिर में कोरोना के चलते किसी भी श्रद्धालु का प्रवेश नहीं होता है। वही मंदिर प्रशासन ने नंदीहाल की व्यवस्था के लिए एक अधिकारी गर्भ निरीक्षक, कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड तैनात किए हैं। बावजूद इसके एक श्रद्धालु गर्भ गृह के बाहर तक कैसे पहुंच गया। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी मंदिर में किसी का भी प्रवेश नहीं हो रहा है। ऐसे में तमाम सुरक्षा गार्ड ने भी निवेद द्वार की ओर से जाने वाले श्रद्धालु को क्यों नहीं देखा। वहीं नंदीहाल में तैनात रहने वाले अधिकारी कहां गए थे। कारण यह है कि जिम्मेदारी अधिकारी की भी थी तो केवल कर्मचारियों पर ही कार्रवाई क्यों की गई।

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उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा की महाकाल मंदिर में प्रवेश प्रतिबंध के बाद भी दानदाता देहरी तक पहुंच गया। इस लापरवाही को लेकर दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।

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