REWA : बहुचर्चित शिक्षा विभाग में महाघोटाले पर एक्शन : DEO के लेटर हेड में शिकायत के बाद लेखापाल समेत 24 के खिलाफ FIR दर्ज

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( ग्राउंड एमपी 17 ऋतुराज द्विवेदी की रिपोर्ट ) रीवा जिले में बहुचर्चित स्कूल शिक्षा विभाग में हुए महाघोटाले में शामिल लेखापाल समेत 24 के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। बताया गया कि फर्जी सामग्री खरीदी एवं अशासकीय स्कूलों के अनुदान को लेकर 4.41 करोड़ का गबन किया गया था। जिसकी जांच 3 साल से चल रही थी। लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम न आने के बाद जिला प्रशासन के दबाव में डीईओ केपी तिवारी ने सिविल लाइन पुलिस को शिकायती आवेदन सौंपा था। जहां पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मागर्दशन में आईपीसी की धारा 467, 468, 471, 420, 409 और 34 बी का अपराध कायम किया गया है। अब थाना पुलिस आरोपियों की​ गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।

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सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक ओंकार तिवारी ने बताया कि अशोक कुमार शर्मा पद लेखापाल और विजय तिवारी सहायक अध्यापक ने अशासकीय स्कूलों के अनुदान व फर्जी सामग्री खरीदी के नाम पर 4.41 करोड़ का गबन किया था। जिन्होंने अपने 22 सगे संबंधियों को फर्नीचर, ट्रेडर्स और स्टेशनरी के नाम पर उनके खाते में भुगतान कर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था। जिसकी जांच 1 मार्च 2018 चल रही थी। इस फर्जीवाड़े की जद में आकर कई डीईओ भी नप चुके है।

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1039 पन्ने की जांच में 24 लोगों को माना है आरोपी

पुलिस ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने इस पूरे महाघोटाले में शामिल 24 लोगों के खिलाफ 1039 पन्ने का पुलिंदा तैयार किया है। शिक्षा विभाग की गोपनीय जांच में लेखापाल अशोक कुमार शर्मा और सहायक अध्यापक विजय तिवारी को मुख्य आरोपी माना है। उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने चहेतों को फर्जी सामग्री खरीदी के नाम पर करोड़ो रुपए शासन के डकार दिए थे। जबकि अशासकीय स्कूलों को अनुदान के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं दी थी।

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जिले का बहुचर्चित है मामला

फर्जी भुगतान का यह मामला जिलेभर में बहुचर्चित है। ऐसे में 3 अगस्त की शाम जिला शिक्षा अधिकारी केपी तिवारी के लेटर हेड में शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस ने तुरंत एफआईआर कर ली है। अब पुलिस 1039 पन्ने की जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर शिक्षा विभाग से पूरी जानकारी जुटाते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए है।


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