MP : रजिस्ट्रेशन में धांधली का मामला उजागर : ठेका कंपनी और यूनिवर्सिटी स्टाफ की साठगांठ, 1 रजिस्ट्रेशन पर 2 स्टूडेंट्स ने दी परीक्षा

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मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी में अब रजिस्ट्रेशन में धांधली सामने आई है। 2018-19 में नर्सिंग फर्स्ट ईयर की परीक्षा के लिए एक छात्रा को रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया। परीक्षा में छात्रा की जगह दूसरे छात्र के नाम से एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया। इसी तरह एक अन्य छात्रा के रजिस्ट्रेशन पर दूसरी छात्रा को प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया। ये गड़बड़ी रिजल्ट बनाने वाली ठेका कंपनी माइंड लॉजिस्क ने कुछ अधिकारियों से मिलीभगत से की गई।

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एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो छात्र-छात्राओं को एडमिट कार्ड जारी करने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। आरोप लग रहे हैं कि अवैध तरीके से छात्र-छात्राओं को परीक्षा में शामिल करके परीक्षा परिणाम तैयार किया गया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने गड़बड़ी होने पर जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही है।

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BSC नर्सिंग फर्स्ट ईयर में प्रवेश के समय छात्रा को रजिस्ट्रेशन नंबर एनपी 144 एन 000018038 जारी हुआ। इसी रजिस्ट्रेशन पर बीएससी नर्सिंग फर्स्ट ईयर 2020 की परीक्षा के लिए एक छात्र को एडमिट कार्ड जारी हो गया। बीएससी नर्सिंग फर्स्ट ईयर में एडमिशन के समय एक छात्रा को रजिस्ट्रेशन नंबर एनपी 144एन 000018029 हुआ। इसी रजिस्ट्रेशन नंबर पर बीएससी नर्सिंग फर्स्ट ईयर मेन एंड सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए फरवरी 2020 में दूसरी छात्रा को प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया।

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मिलीभगत से ही हेराफेरी संभव

रजिस्ट्रेशन में हेराफेरी का खेल कॉलेज, विश्विद्यालय से लेकर ठेका कंपनी के बीच मिलीभगत से हुआ है। कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद सीट छोड़ने वाले छात्र-छात्राओं के नाम पर यह धांधली की गई। अधिक कमाई के चक्कर में कॉलेज ने खाली सीटों पर दूसरे छात्र-छात्राओं को एडमिशन दे दिया। यह खेल रजिस्ट्रेशन की तारीख निकल जाने पर किया गया। ठेका कंपनी से मिलीभगत करके पुराने रजिस्ट्रेशन पर ही नए एडमिशन दिए गए और परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए।

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यह है नियम, सॉफ्टवेयर ने कैसे नहीं पकड़ी गड़बड़ी

नियम है कि विश्वविद्यालय में एक छात्र को एक बार ही रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है। ये रजिस्ट्रेशन नंबर किसी दूसरे छात्र को जारी नहीं हो सकता। यूनिवर्सिटी स्तर पर भी सत्यापन की प्रक्रिया होती है। हैरानी की बात ये है कि रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होने के बावजूद सॉफ्टवेयर ने एक ही नामांकन नंबर पर दो अलग-अलग परीक्षार्थियों के नाम दर्ज होने की गड़बड़ी नहीं पकड़ी। रजिस्ट्रेशन में भी हेराफेरी का प्रकरण सामने आने के बाद ठेका कंपनी और जिम्मेदारों की भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है। इस मामले की जांच कराई जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।

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माइंड लॉजिस्क कंपनी धांधली के चलते ही टर्मिनेट

ठेका कंपनी माइंड लॉजिस्क इंफ्रा टेक ने यूनिवर्सिटी के एक बाबू के निजी मेल पर घोषणा से पहले रिजल्ट भेज दिया था। इसी तरह एग्जाम कंट्रोलर के भी अवकाश पर रहते हुए उनके निजी मेल पर रिजल्ट भेजे गए थे। उक्त दोनों के कहे अनुसार परिणामों में भी फेरबदल किया गया। इस मामले का खुलासा हुआ तो चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग के आदेश पर 4 अधिकारियों को यूनिवर्सिटी से चलता कर दिया गया था, पर वे कोर्ट से स्टे लेकर फिर से आ गए हैं। अब नामांकन में गड़बड़ी सामने आने के बाद एक फिर रिजल्ट बनाने वाली ठेका कंपनी और यूनिवर्सिटी प्रशासन सवालों के घेरे में है।

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