VIDEO : कुत्तों को स्कूटी पर खाना लेके जाने वाली इस लड़की की पढ़िए पूरी कहानी : PSC निकलने का है लक्ष्य


आज के दौर में जहां इंसान स्वार्थ की दौड़ में लगा हुआ है और उसे अपने सिवाय दूसरा कोई नजर नहीं आता ऐसे समय में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने जीवन के साथ-साथ पशु पक्षियों के साथ भी लगाव रखते हैं और उनके दुख का उन्हें एहसास होता है। शहडोल के पटेल नगर में रहने वाली हिमांशी पटेल उन्हीं में से एक हैं जो शहर के कुत्तों के लिए अपनी स्कूटी में भोजन रखकर चलती हैं हिमांशी पटेल स्कूटी की डिग्गी में ब्रेड बिस्किट और घर में पकाया हुआ चावल रोटी रख कर चलती है रास्ते में जहां भी उन्हें कुत्ते नजर आते हैं वह स्कूटी को रोकती है और डिग्गी से उनके लिए खाना निकाल कर बड़े प्यार से परोसती हैं।


इस घटना से मन में पैदा हुआ प्यार

हिमांशी बताती हैं कि उनके घर में तीन कुत्ते पले हुए हैं एक बार उनको खाना देने में किसी कारण लेट हो गया और जब उनको खाना परोसा तो वह इतने भूखे थे कि खाने पर टूट पड़े हिमांशी ने कहा कि उसी समय घर के बाहर एक कुत्ता जो बहुत ही कमजोर नजर आ रहा था उसे भी ब्रेड खाने को दी तो वह मुझे बहुत ही दयनीय दृष्टि इसे देखने लगा तब से मन में लगा कि मैं अब शहर में घूमने वाले कुत्तों के लिए भी भोजन दिया करूंगी और यह काम 2 महीने पहले ही शुरू किया। हिमांशी ने बताया कि कुत्तों के अलावा और भी जो दूसरे जानवर हैं हम उनके लिए भी भोजन देने का काम करते हैं।


फेसबुक पर बनाया फीडिंग हंगरी सोल्स पेज

हिमांशी पटेल ने बताया कि मैंने अभी हाल ही में अपनी फेसबुक आईडी पर फीडिंग हंगरी सोल्स नाम का एक पेज तैयार किया है। इस पेज में वह प्रतिदिन की जो भी एक्टिविटी होती है उसको अपडेट करती हैं । उनका कहना है कि प्रतिदिन 300 से ₹400 का खर्च आता है। पहले तो अपनी पॉकेट मनी और मम्मी से पैसे लेकर मैं खर्च करती थी अब हम लोगों ने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक ग्रुप बनाया है जो आपस में इस खर्च को शेयर करते हैं।


हिमांशी ने बताया कि मेरे काम को देखकर शहर के कुछ लोग भी अब मदद करने लगे हैं वह तो या तो सामान दे देते हैं या फिर हमें पैसे देते हैं । हिमांशी का कहना है कि मेरा लक्ष्य पी एस सी एग्जाम को निकाल कर एक ऑफिसर बनना है और जब मैं ऑफिसर बन जाऊंगी तब मैं बहुत बड़े स्तर पर यह काम करूंगी।


कोरोना है इसलिए मास्क लगाकर निकलते हैं

हिमांशी ने बताया कि कोरोना के चलते पापा मना करते थे कि बाहर मत जाया करो लेकिन जब पापा ऑफिस चले जाते हैं तब मैं मास्क बांधकर घर से निकलती हूं और फिर यह काम करती हूं। वापस आने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोती हूं खुद को सेनिटाइज करती हूं कपड़े धोती और नहाने के बाद ही घर में काम करती हूं।


उन्होंने लोगों से भी कहा है कि वे अपने लिए तो सब करते हैं लेकिन आसपास के ऐसे जानवर जो सड़कों पर घूमते हैं उनके जीवन के लिए भी कुछ काम करें । अपने घर में बचे हुए खाने को इधर-उधर ना फेंके बल्कि आसपास के कुछ जानवर जो घूमते हैं उनको खिलाएं ताकि उनकी जिंदगी बच सके।


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