REWA : कलेक्टर के गले का फास बना BRCC का भ्रटाचार , 6 माह बाद भी नही हुई कार्यवाही

            

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। जनपद शिक्षा केन्द्र सिरमौर व रीवा में पदस्थ रहे पूर्व  बीआरसीसी प्रवेश तिवारी पर वित्तीय अनियमितता की जांच पूरी हो चुकी है। लेकिन कार्यवाही की फाइल जांच अधिकारीयो ने दबा रखी है। आरोप था कि सिरमौर में प्रभार लेने के महज एक सप्ताह में महिला बीजीसी (कनिष्ठ) को अपना सह-खातेदार बना कर 90 हजार रूपये कि राशि का आहरण  कर लिया जबकि नियमानुसार वरिष्ठ बीएसी को सह खातेदार बनाया जाना चाहिए था लेकिन नहीं बनाया। और महज 1 सप्ताह के भीतर ही पूल वाहन के नाम पर घोटाला करते हुए 90 हजार रूपये नियम विरूध आहरण कर लिया, इतना ही नही कार्यालय में रात्रिकालीन में चौकीदार की नियुक्ति भी अपनी मर्जी से नियम विरूद्ध कर 2 माह का भुगतान कर लिया। जब यह मामला सामने आया तो जांच की गई जिसमें पूरी पदस्थापना ही नियम विरुद्ध पाई गई।

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डीपीसी कार्यालय के वित्त अधिकारी पुष्पराज सिंह ने वार्षिक जांच के दौरान पाया कि सिरमौर बीआरसीसी के पद पर पदस्त रहते प्रवेश तिवारी फर्जी बिल तैयार कर राशि का अहरण किया। इससे पहले भी प्रवेश तिवारी पर वित्तीय अनियमितता के दोषी पाये जा चुके हैं। लेकिन अधिकारीयो के मेहरवानी के चलते 5 माह से फाइन रद्दी की टोकरी में पडी हुई है। सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक जिला शिक्षा कार्यालय के एक बाबू ने उस फाइन को जिला शिक्षा अधिकारी के कहने पर दवा रखा है जिसमें रीवा बीआरसीसी रहते हुये प्रवेश तिवारी ने लाखों रूपये का वित्तीय दोसी पाये गये है। फाइल इस लिये वरिष्ठ अधिकारीयों के पास नही भेजी जा रही है क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी ने बाबू को कार्यवाई के लिये भेजने से मना कर रखा है। लगभग 5 माह से रीवा जनशिक्षा कार्यालय में हुये भ्रष्टाचार व सिरमौर जनपद में किये गये भ्रटाचार की कार्यवाई ना होना प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।

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जनपद शिक्षा केंद्र रीवा में पदस्थ रहने के दौरान जब प्रवेश तिवारी भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो तत्कालीन कलेक्टर ने कार्यवाही करते हुए वित्तीय अनियमितता के आरोप में इन्हें हटा दिया गया, लेकिन विभाग के अन्य कर्मचारियों के साथ सांठगांठ करके सिरमौर में इन्होंने अपनी पदस्थापना बीआरसी के पद पर नियम विरुद्ध करवा ली। लेकिन नियम विरुद्ध हुई इस पदस्थापना के विरुद्ध वर्तमान बीआरसीसी ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी जिसका परिणाम यह रहा कि इन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर वहां से भी हटा दिया गया। लेकिन तब तक तक प्रवेश तिवारी ने भ्रष्टाचार की चरम सीमा को पार कर दिया और वहां भी जमकर लूट की। 

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सिरमौर में पदस्थ रहने के दौरान प्रवेश तिवारी पर जहां यह आरोप लगा कि इन्होंने कनिष्ठ बीजीसी को अपना सह खातेदार बनाकर ₹90000 एक ही झटके में आहरित कर लिया। यह राशि पूल वाहन के नाम पर हरण की गई। जबकि नियमानुसार सह खातेदार वरिष्ठ बीएसी को बनाया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। तत्कालीन डीपीसी सुधीर कुमार बांडा ने भी इस मामले पर कोई कार्यवाही नहीं की जिसका परिणाम यह रहा कि यह भ्रष्टाचार के लिए आगे बढ़ते रहें और इन्होंने फर्जी तरीके से रात में चैकीदार की भी नियुक्ति कर ली जिसकी ना तो कोई जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को हुई और ना ही इन्होंने कोई प्रतिवेदन भेजा। 

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जब यह मामला मीडिया में आया तो आनन-फानन में फाइल तैयार की गई लेकिन तब तक नियम विरुद्ध रात्रिकालीन चौकीदार को 2 माह का वेतन भी भुगतान कर दिया गया। वर्तमान में पूर्व बीआरसी द्वारा पदस्थ किया गया चौकीदार का पता ही नही की वह कहा हैं चौकीदार ना तो वह अपनी नियुक्ति पर दावा पेश करने आया और ना ही कोई वेतन की मांग करने आया क्योंकि यह पूरी नियुक्ति कागजों में की गई थी।  प्रवेश तिवारी पर यह भी आरोप लगा था कि जनपद शिक्षा केंद्र रीवा में कार्यालय की शासकीय सामग्री अपने घर में उठा ले गए हैं जिसकी जांच भी कराई गई जांच पूरी होने के बाद भी अब तक जांच प्रतिवेदन संबंधित जांच अधिकारियों द्वारा कलेक्टर के पास नहीं भेजा गया इससे यह भी साबित हो रहा है कि प्रवेश तिवारी का दबदबा प्रशासनिक अधिकारियों पर बना हुआ है। 

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कलेक्टर ने वित्तीय अनियमितता के चलते व कार्यालय की सामग्री अपने घर ले जाने के आरोप में पद से हटाया था इतना ही नही बल्कि घोटाले की गई राशि वसूली, एक वेतन वृद्धि रोकने और जांच के निर्णय के उपरांत यदि एफआईआर होने लायक हो तो एफआईआर तक दर्ज कराने की अनुशंसा की गई थी। लेकिन जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारी, डीपीसी कार्यालय के अधिकारियों ने मिलीभगत करके इस पूरे मामले को ही गोलमाल कर दिया और आज यह फाइल कार्यवाही के लिए घूम रही है। 

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इनका क्या कहना है...

जनपद शिक्षा केंद्र सिरमौर में पदस्थ रहने के दौरान प्रवेश तिवारी ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा था, जिसकी जांच डीपीसी कार्यालय के वित्त अधिकारी पुष्पराज सिंह द्वारा की गई और जांच में पाया गया कि पूल वाहन के नाम पर 90, हजार और रात्रिकालीन चौकीदार की नियुक्ति में भ्रष्टाचार किया गया और साथ ही चौकीदार के नाम पर 2 माह का वेतन भी आहरण कर किया गया। लेकिन अब तक क्या कार्यवाही हुई इसकी जानकारी वरिष्ठ कार्यालय ही दे पाएगा।

सुधीर कुमार साकेत, बीआरसीसी सिरमौर

मेरे द्वारा जांच की गई थी जांच में गड़बड़ियां पाई गई, लेकिन अभी प्रतिवेदन तैयार नहीं किया जा सका है..... मैं व्यस्त हूं...जल्द ही अभिलेखों का निरीक्षण कर प्रतिवेदन तैयार का वरिष्ठ कार्यालय को प्रेषित करूंगा। 

 पुष्पराज सिंह, वित्त अधिकारी डीपीसी कार्यालय रीवा

• रीवा में BRCC पद पर पदस्थ रहने के दौरान की गई अनियमितताओं की फाइल CEO जिला पंचायत REWA के द्वारा जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में 4 माह से रखी हुई है। जहां महज टाइम पास किया जा रहा है क्योंकि इस फाइल में ₹1,71,000 वसूली के लिए CEO ने जांच बैठाई है।

• जनपद शिक्षा केंद्र रीवा में अपने कार्यकाल के दौरान शासकीय सामग्री कार्यालय से ले जाकर घर में रख ली थी। जिसके जांच के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए, तब आनन-फानन में टूटी-फूटी सामग्री जमा कर फर्जी पंचनामा तैयार कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है। यह जांच जहां तीन दिवस में की जानी थी लेकिन 3 माह बीत गए।

• कलेक्टर द्वारा दिए गए जांच को जांच टीम के अधिकारी महज टाइम पास का जरिया बना लिया है। 3 दिन में जांच पूर्ण होने वाली जांच तीन माह में भी पूरी नही हुई लेकिन ना तो कलेक्टर ने जांच में संलग्न कर्मचारियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई की और ना ही दोसी के ऊपर। 

• रीवा एवं सिरमौर में पदस्थ रहे पूर्व बीआरसी प्रवेश तिवारी के द्वारा किये गये भ्रष्टाचार सिद्ध है बावजूद इस पर कार्यवाही के बजाय वरिष्ठ अधिकारी की मेहरबानी समझ से परे है। 

• कलेक्टर के बार-बार भ्रष्टाचार के विरूद्ध कड़ाई से कार्यवाही करने के निर्देश देने के बाद भी डीईओ कार्यालय में जाँच लंबित है।

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