REWA : नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से संचालित हो रहा चाय सुट्टा बार : निगम प्रशासन बेखबर


रीवा,अभिषेक दुबे । शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके शिल्पी प्लाज़ा के पीछे स्थित चक्रधर सिटी के सामने स्थित हाकर्स कार्नर का निर्माण हाँथ ठेला व्यपारियों के लिए करवाया गया था किंतु हाँथ ठेला व्यापारियों ने वहां जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई तो इस बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण कारियों की नजर पैड गई जिन्होंने फर्जी दस्तावेज के आधार पर टीन शेड का निर्माण कराकर बड़े से एरिया में एक दुकान नुमा ढांचा तैयार किया गया और उसमें वर्तमान समय मे सुट्टा बार के नाम से चाय की दुकान संचालित की जा रही है। जो कि अतिक्रमण की श्रेणी में आती है इस संबंध जब हमारे संवाददाता द्वारा जोन क्रमांक 2 के अतिक्रमण विरोधी दल के प्रभारी रावेंद्र शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बड़े ही लापरवाही भरे अंदाज में कहा कि क्या हम वहां बैठे रहें कि अतिक्रमण न होने पाए इसके बाद जब उन्होंने गलती का एहसास हुआ तो इस पूरे मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर डालते हुए कहा कि जब उनका निर्देश मिलेगा तो अतिक्रमण हटवा दिया जाएगा। 


इस पूरे मामले में सबसे मजेदार तथ्य यह भी है कि नगर निगम द्वारा उक्त दुकान संचालक को लगभग एक वर्ष पूर्व अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है बाबजूद इसके शहर के बीचों बीच स्थित शासकीय जमीन को अतिक्रमण कारियों ने कब्जा कर लिया और नगर निगम प्रशासन कुम्भकर्णी नींद सोता रहा।



नगर निगम रीवा की शासकीय भूमि में अब कोई भी व्यक्ति अतिक्रमण कर सकता है,अतिक्रमण विरोधी दस्ते को केवल गरीब और छोटे व्यवसायियों का अतिक्रमण दिखाई देता है जबकि रसूखदार एवं बड़े अतिक्रमणकारियों पर नगर निगम प्रशासन मेहरबान दिखाई देता है। 


नगर पालिक निगम रीवा की बेशकीमती जमीन पर रसूखदार बिना किसी डर के अवैध कब्जा कर रहे हैं और राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं, इस ओर नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है और केवल नोटिस जारी कर कार्यवाही को खत्म किया जा रहा है। 



जानकारी के मुताबिक चक्रधर सिटी सेंटर एवं सैमसंग केयर के सामने चाय सुट्टा बार के नाम से व्यवसाय करने वाले व्यापारी द्वारा नगर निगम की शासकीय भूमि पर बिना किसी अनुमति के व्यापार किया जा रहा है, एवं अवैध रूप से टीन शेड का निर्माण कर लिया गया है। किंतु अब तक नगर निगम द्वारा इसे हटाने की कोई कार्यवाही नहीं की गई। एक वर्ष पूर्व नगर निगम ने एक नोटिस जारी कर मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया। नगर निगम के इस दोहरे रवैये से साफ जाहिर होता है कि अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही केवल गरीबों के लिए होती है और बड़े अतिक्रमणकारियों को अभयदान दिया गया है।

तीस हजार रुपये मासिक किराये पर हुआ है एग्रीमेंट

सूत्रों की मानें तो अब्दुल वफ़ाती से तीस हजार रुपये प्रति माह के मासिक किराये पर चाय सुट्टा बार संचालित करने वाले ने एक एग्रीमेंट किया है जिसके तहत यह दुकान खोली गई है लेकिन नगर निगम ने अपने नोटिस में साफ तौर पर यह स्पष्ट किया है कि यह एक अतिक्रमण है जिसे हटाया जाएगा लेकिन सवाल यह है कि जब यह अतिक्रमण किया गया है तो किसी ने इसे कैसे एग्रीमेंट कर इसे किराये पर दे दिया है।



आखिर किसका प्राप्त है संरक्षण
बताया यह जाता है कि इस रिक्त पड़ी शासकीय भूमि पर कई लोगों की गिद्ध जैसी नजर है और धीरे धीरे कर इसमें कब्जा किया जा रहा है, सूत्रों की मानें तो यहाँ अतिक्रमण करवाने में नगर निगम के जोन क्रमांक 2 के कई अधिकारियों का भी हाँथ है। उच्च स्तर पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। जल्द ही इस अतिक्रमण की वास्तविक अन्य जानकारी भी प्रकाशित की जाएगी।

रीवा से पत्रकार अभिषेक दुबे की रिपोर्ट 

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