ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन, काफी खतरनाक होने से बढ़ी चिंता, अब तक 30 से अधिक देशों में फैला


लंदन। कोरोना महामारी  से पूरी दुनिया जूझ रही है और अब कोरोना के नए स्ट्रेन  सामने आने के बाद से चिंता और भी बढ़ गई है। ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन मिलने के बाद अब तक 30 से अधिक देशों में ये फैल चुका है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में एक तीसरे तरह के कोरोना के स्ट्रेन मिला है।


बताया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का यह नया वैरियंट ब्रिटेन में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन से काफी खतरनाक है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने सोमवार को कहा कि दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया वैरियंट मिला है, जो कि ब्रिटेन में मिले नए कोरोना स्ट्रेन से अधिक खतरनाक और संक्रामक है।


मैट हैनकॉक ने एक ब्रिटिश रेडियो चैनल से बात करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीकी वैरियंट के बारे में मैं अविश्वसनीय रूप से चिंतित हूं। लिहाजा, ब्रिटेन ने दक्षिण अफ्रीका से सभी उड़ानों को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा ही महत्वपूर्ण समस्या है।


कोरोना वैक्सीन नए वैरियंट के खिलाफ होगी कारगर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के वैज्ञानिकों को आशंका है कि कोरोना वैक्सीन दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए वैरियंट के खिलाफ कारगर रहेगी। हालांकि, ब्रिटिश वैज्ञानिकों को इस बात पर पूरा भरोसा नहीं है कि कोरोना वैक्सीन दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नए स्ट्रेन पर काम करेगी।


बता दें कि ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में बीते महीने कोरोना के नए वैरियंट के मामले सामने आए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पहले के मुकाबले 70 फीसदी तेजी से फैलता है। लिहाजा, कोरोना संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आने के बाद से ब्रिटेन में सख्ती से प्रतिबंधों को लागू किया गया है, तो वहीं कई देशों ने ब्रिटेन से आने वाली विमानों पर अस्थायी रोक लगा दी है।


क्यों अधिक खतरनाक है दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया वैरियंट

वैज्ञानिकों के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का जो नया वैरियंट मिला है वह अलग है, क्योंकि इसमें महत्वपूर्ण स्पाइक प्रोटीन में कई परिवर्तन हैं। स्पाइक प्रोटीन में परिवर्तन के कारण वायरस मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए उपयोग करता है।


इतना ही नहीं, कोरोना का ये नया स्ट्रेन एक उच्च वायरल लोड के साथ भी जुड़ा है। यानी कि कोरोना मरीजों के शरीर में वायरस कणों की उच्च एकाग्रता, जो संभवतः संक्रमण के उच्च स्तर में सहायक होता है।
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