BLACK FUNGUS : 33 मरीजों को एंटी फंगल इंजेक्शन के रिएक्शन का मामला उजागर, रिएक्शन के बाद शासन ने भेजी टेबलेट, डॉक्टरों ने एक भी मरीज को नहीं दी

    

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 33 मरीजों को एंटी फंगल इंजेक्शन के रिएक्शन का मामला उजागर होने के बाद रविवार को भोपाल से टेबलेट भेजी गईं, लेकिन टेबलेट की स्ट्रिप भी पिछली बार भेजी गईं स्ट्रिप से अलग थीं, जिसके कारण डॉक्टरों को एक बार फिर रिएक्शन होने की आंशका हुई और उन्होंने मरीजों को टेबलेट देने से मना कर दिया।

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इधर, दवाओं के अभाव में मरीजों का इंफेक्शन बढ़ता जा रहा है। वार्ड में ब्लैक फंगस वाले 42 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 33 मरीजों को इंजेक्शन लगने के बाद साइड इफेक्ट हुआ था, वहीं वार्ड में 5 मरीज ऐसे हैं जिनकी आंखों में संक्रमण फैल चुका है। प्रतिदिन 5 इंजेक्शन व टेबलेट की जरूरत है, लेकिन 48 घंटे से इन्हें दवाएं नहीं मिलीं।

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गौरतलब है कि शासन स्तर से पहले जो इंजेक्शन व टेबलेट उपलब्ध कराए जा रहे थे, उन्हें बदलकर अब सस्ती दवाएं भेजी जा रहीं हैं। जिसके पहले ही लॉट में मरीजों को रिएक्शन हुआ।

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शासन स्तर से जो इंजेक्शन भेजे गए हैं, वे साधारण एम्फोटेरेसिन-बी हैं। करीब 350 इंजेक्शन सागर भेजे गए थे। इनमें से 33 मरीजों की ड्रिप में 3-3 इंजेक्शन डाले गए। यानी कुल 99 इंजेक्शन इस्तेमाल हुए। बाकी बचे इंजेक्शन अधीक्षक कार्यालय में जमा कराए हैं।

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जिन्हें वापस भोपाल भेजा जाएगा। लेकिन सस्ते इंजेक्शऩ के इस्तेमाल और खरीदी की बात पर अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। यदि इन इंजेेक्शऩ की खरीदी शासन स्तर से भी हुई है तो भी इसी जांच होना चाहिए। मामले को लेकर डीन डॉ. आरएस वर्मा का कहना है कि मामले जानकारी शासन को दे दी गई है।

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इंजेक्शन वापस भेजे जाएंगे। आगे की कार्रवाई भोपाल स्तर से ही होगी। कांग्रेस कमेटी ने की जांच की मांग : इधर, सस्ते और घटिया इंजेक्शन की खरीदी को लेकर कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने शिवराज सरकार को घेरते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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चौधरी का कहना है कि प्रदेश सरकार पैसे बचाने के लिए मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है। इसकी पुष्टि बीएमसी में हुई घटना से होती है। 7800 के इंजेक्शन की जगह 324 रुपए के इंजेक्शन भेजे गए। यदि इस मामले की जांच की जाए तो कई मंत्री और अधिकारी इंजेक्शन की खरीदी में शामिल होंगे।

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