REWA : नई गाइडलाइन जारी : 1 अगस्त से प्रवेश प्रक्रिया शुरू : आपराधिक प्रकरण वालों को कॉलेज में नहीं मिलेगा एडमिशन

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मध्य प्रदेश में कॉलेजों को राजनीति का अड्डा व आपराधिक लोगों की दखलंदाजी को देखते हुए हायर एजुकेशन ने नया फरमान जारी किया है। नई गाइड लाइन के मुताबिक ऐसे छात्र जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण कोर्ट में चल रहे हैं। या फिर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। उन्हें महाविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

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बताया गया कि इस नियम का पालन आगामी 1 अगस्त से होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में किया जाएगा। ऐसे में में हायर एजुकेशन द्वारा जिले के समस्त महाविद्यालयों को भेजी गई प्रवेश की नियमावली में उल्लेख किया है। साथ ही ऐसे छात्र जिन्होने महाविद्यालय में पूर्व में किसी छात्र, अधिकारी-कर्मचारी, प्राध्यापक के साथ मारपीट की होगी, उन्हें भी महाविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा।

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तो घट जाएगी छात्रों की संख्या

शासकीय विधि महाविद्यालय रीवा के प्राचार्य प्रो. योगेन्द्र तिवारी ने बताया कि जिले के विभिन्न महाविद्यालयों में अध्ययनरत कई छात्र ऐसे हैं जिनका पूर्व में अपने प्राध्यापकों, सहपाठी छात्रों या फिर कर्मचारियों से विवाद हुआ है। फिर मारपीट की शिकायत थाने और न्यायालय तक पहुंची। ऐसे में नियम यदि लागू हो गया तो कई छात्र इस दायरें में आएंगे। जिससे महाविद्यालयों में छात्रों की संख्या घट सकती है।

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शहर की दो कॉलेज जरूर आएंगी दायरे में

अगर हायर एजुकेशन के निर्णय का पालन महाविद्यालयों द्वारा किया गया तो अधिकतर छात्र महाविद्यालयों से बाहर हो जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा असर शहर के टीआरएस कॉलेज व मॉडल साइंस कॉलेज में देखा जाएगा। फिलहाल हायर एजुकेशन के निर्देश का पालन महाविद्यालय स्तर में किस हद तक किया जाएगा। इसका पता अगस्त माह में चल जाएगा।

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देना होगा शपथ पत्र

प्रदेश के बाहर से आने वाले छात्रों को महाविद्यालय में एडमीशन के लिए शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में गलत जानकारी देने पर प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं अगले 3 साल तक किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बाहरी छात्रों को प्रवेश के पूर्व प्राचार्यों द्वारा संबंधित राज्यों और स्थानीय केन्द्र के माध्यम से पुलिस सत्यापन कराना होगा।

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एफआईआर से नहीं पड़ेगा फर्क

नियमावली के अनुसार केवल एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में एडमीशन में फर्क नहीं पड़ेगा। चालान पेश होने और न्यायालय में आपराधिक प्रकरण चलने की स्थिति में ही महाविद्यालयों में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। सूत्रों की माने तो पूर्व के वर्षों में भी यह नियम लागू था। लेकिन नियम स्पष्ट न होने का छात्रों को प्रवेश मिल जाता था। इस बार हायर एजुकेशन ने प्रवेश के लिए बनी गाइडलाइन को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।



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