MP से UP लाई जा रही रेत, जोरों पर चल रहा अवैध खनन माफिया का धंधा


रीवा. अवैध खनन का धंधा बेरोकटोक जारी है। खनन माफिया बेधड़क अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस हो या खनिज विभाग दोनों के ही अधिकारी अवैध खनन के इस धंधे पर अंकुश लगा पाने में पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहे हैं। आरोप तो यहां तक लग रहा है कि पुलिस व खनिज विभाग की मिलीभगत से ही यह धंधा फलफूल रहा है।


बताया जा रहा है कि खनन माफिया सोन नदी से रेत का अवैध खननन कर उसे रीवा से होते यूपी के इलाहाबाद तक पहुंचा रहे हैं। ये सब पुलिस व खनिज विभाग की जानकारी में है फिर भी वो इन खनन माफिया पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। आरोप तो यह भी लगाया जा रहा है कि खनन माफिया पुलिस और खनिज विभाग के अफशरों को मालामाल कर बेखौफ हो कर अपना धंधा चला रहे हैं।


अगर कहीं इस खनन का मामला तूल पकड़ने लगता है तो पुलिस व खनिज विभाग फौरी तौर पर एकाध कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। बता दें कि हाल ही में टमस नदी से निकाली गई रेत से भरे छह ट्रैक्टरों को त्योंथर के एसडीओपी नवीन दुबे ने पकड़ा था। हालांकि रेत तस्कर पुलिस के हाथ नहीं लगे। पुलिस को अभी तक उनकी तलाश है।


ये है माडस आपरेंडी
बताते हैं कि अवैध खनन में सबसे ज्यादा मददगार है सीधी जिले के रामपुर नैकिन थाने की पुलिस। आरोप है कि इनकी छत्रछाया में रेत सीधी से रीवा जिले पहुंचती है। फिर यहां से गुढ़, गोविंदगढ़, रायपुर कर्चुलियान, गढ़, चाकघाट, जनेह होते यूपी पहुंचाई जाती है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इन थानों पर पुलिस कप्तान की विशेष नजर है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अवैध परिवहन की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन माफिया पर इसका तनिक भी असर नहीं है।


सीधी के सोन नदी की रेत से अलग अगर रीवा की बात करें तो यहां भी माफिया, टमस, बेलन, महाना, नैना, गोरमा, बिछिया, बीहर व ओड्डा नदी से रेत निकालने का काम करते हैं। रेत को सरकारी काम के लिए ग्राम पंचायतों में इस्तेमाल किया जाता है।


हर डंपर का रेट कार्ड है निर्धारित

बताया तो यहां तक जाता है कि सेवा शुल्क के तौर पर प्रत्येक डंपर का रेट कार्ड निर्धारित है। एक ट्रक यानी 20 टन रेत निकालने के लिए एक थाने में 500 रुपये देना पड़ता है। रामपुर नैकिन से लेकर इलाहाबाद जिले के बीच में कुल 7 थाने पड़ते हैं। लिहाजा सोन नदी की रेत 6 हजार रुपये डंपर, साढ़े 3 हजार सेवा शुल्क, 8 हजार रुपये वाहन किराए के साथ इलाहाबाद पहुंचकर 17,500 रुपये में पड़ती है। वहां रेत पहुंचने के बाद उस रेत की कीमत तकरीबन 35 हजार रुपये तक हो जाती है। रेत का अवैध परिवहन करने वाले लोगों को मुनाफे के तौर पर खर्च का दोगुना मिलता है। लिहाजा यह कारोबार फल-फूल रहा है।


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