REWA : रिमही जनता पूछती है ? ..साहब, कहां से आते हैं तमंचे

रीवा। साहब, कहां से आते हैं तमंचे। शायद यही प्रश्न है जो रीवा जिले की रिमही जनता इन दिनों पुलिस विभाग के आलाधिकारियों से पूछती नजर आ रही है। हो भी क्यों न। छोटे-छोटे विवादों में गोली चलने की घटना। जिले में हो रहे गैंगवार व घटना स्थल पर मिलने वाले 9 एमएम के खोखे इस बात को प्रमाणित कर रहे हैं कि रीवा अब अवैध असलहों की मण्डी होती जा रही है। 

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जी हां हम उसी 9एमएम की बात करने जा रहे हैं जो केवल डिफेंस व शासन सप्लाई के नाम से जानी जाती है। हम आपको बता दें कि 9एमएम का लाईसेंस भी सामान्य व्यक्ति को नहीं दिया जाता है। सेना व सुरक्षा से जुड़े शासकीय इकाईयों के सप्लाई के बाद 9एमएम पिस्टल का लाईसेंस केवल निशानेबाजों को शासन के अध्यायदेश के बाद दिया जाता है। लेकिन अगर आपको 9एमएम के कारतूस व पिस्टल चाहिए तो रीवा में उपलब्ध हैं। विगत दो हफ्तों में जिस तरह गोली चालन की घटनाएं प्रकाश में आई है वह सत्ता पक्ष के नेताओं सहित आम आदमी के माथे पर चिंता की लकीरे खींच देने के लिए पर्याप्त हैं।

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एक दर्जन से अधिक वारदातें

रीवा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र अंतर्गत एक दर्जन से अधिक स्थान पर गोली चलने की सूचना प्राप्त हुई है। सरकारी आंकड़ों की माने तो पुलिस यह स्वीकार करती है कि अब तक कुल 9 स्थानों पर गोली चलने की घटना प्रकाश में आई है। हर मामलों में कायमी कर अधिकारी विवेचना की राग अलाप रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस के हाथ में अगर कुछ है तो वह है घटना स्थल पर मिले बुलट के खोखे ही हैं। लेकिन इस ओर पुलिस अधिकारी ध्यान देने के बजाय अपराधी पकड़ने की बात कर रहे हैं।

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थम जाती है विवेचना

हम आपको बता दें कि एक जनवरी 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 तक पुलिस ने कुल 316 आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज किए हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी आर्म्स एक्ट में पुलिस तमंचे जप्त कर आरोपी को जेल भेज देती है। लेकिन जांच में यह जहमत उठाने का प्रयास नहीं करती कि आखिर व कट्टे, पिस्टल, तमंचे, आखिरकार कहां से आते हैं। इन्हें बनाने वाला कौन है। इन्हें बेंचने वाला कौन है। किस मार्ग से आते हैं। कहां बिकते हैं। कुछ यही प्रश्न है जिसे जनता जानना चाहती है और अपराध मुक्त वातावरण में जीना चाहती है।

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आंकड़ों पर एक नजर

अगर जिला कलेक्ट्रेट से बात करें तो रीवा जिले में 1285 भरमार, 12 बोर की कुल 2616, रायफल 315 की 848, रिवाल्वर कुल 56, पिस्टल 23 लाईसेंस शासन द्वारा जारी किए गए हैं। जिसमें तकरीबन 700 लाईसेंस नई शस्त्र नीति के तहत निरस्त भी किए गए। साथ ही नए शस्त्र नीति में लाईसेंस बनने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है। इसके बावजूद राजनैतिक पहुंच एवं कंडीशनल लाईसेंस जारी किए जा रहे हैं। जारी लाईसेंस में भी बुलट की संख्या सीमित व जांच के दायरे में रखी गई है। इन्हें कोटे से अधिक कारतूस नहीं दिए जाते।

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दो गैंगवार

विगत एक पखवाड़े में कुल गैंगवारों की संख्या एक बताई गई है। पहला गैंगवार विश्वविद्यालय थाना अंतर्गत अरूण नगर समीप दो गुटो के बीच हुआ था। यह गैंगवार अधिपत्य को लेकर होना बताया जा रहा है। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश कर रही है।

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कीमत पर एक नजर

नाम न छापने की शर्त पर हथियारों के सप्लायर ने बताया कि 315 बोर का देशी कट्टा 3 से 5 हजार में, अलीगढ़ की बनी हुई रिवाल्वर 15 से 20 हजार, बांदा की बनी हुई पिस्टल 25 हजार, देशी 315 बोर की बंदूक 5 से 7 हजार र्स्पए में दी जाती है। पैसा पहले लेने के बाद सप्लाई एक महीने बाद दी जाती है। यहां आने वाली खेप यूपी से आती है। जिसमें करछना, मिर्जापुर, अलीगढ़, कॉसाम्बी शामिल हैं।

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