REWA : कच्चा मकान ढहने से मलवे में दफन हो गई चार जिंदगी, दम घुटने से निकले प्राण : दो लोग गंभीर रूप से अस्पताल में भर्ती

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विंध्य में एक सप्ताह से चल रही रिमझिम बारिश ने रविवार की भोर कहर बरपाया है। बताया गया कि गढ़ थाना क्षेत्र के बहेरा घुचियारी गांव में कच्चा मकान ढहने से एक परिवार के चार लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में मां-बेटे और दो पोतियों शामिल है। हालांकि दो लोगों को गंभीर हालात में मलवे से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया है। 

                        

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आरोप है कि गांव में सड़क नहीं है। इसलिए जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच पाए है। जिससे रेस्क्यू कार्य ग्रामीणों के भरोसे चल रहा है। गांव वाले खुदाली और फावड़ा से मलवे को हटा रहे है। मरने वालों की पुष्टि कलेक्टर इलैया राजा टी ने की है।

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कलेक्टर इलैया राजा टी ने बताया कि बहेरा गांव में रविवार की अलसुबह करीब 5 बजे स्वर्गीय राम भाउराम पाण्डेय का पुस्तैनी कच्चा मकान था। जहां उनकी पत्नी और बेटे बहू नाती पोते रहे रहे थे। रोजाना की तरह पाण्डेय परिवार शनिवार की रात्रि खाना खाकर अपने अपने कमरे में सो रहे थे। लेकिन एक सप्ताह से चल रही बारिश के कारण पूरे घर में सिहलन बन गई थी।

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तभी रविवार की अल सुबह पूरा कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। हादसे में मां केमली पाण्डेय (60), बेटा मनोज पाण्डेय (35), नातिन कालज पाण्डेय (8),आंचल पाण्डेय (7) की दम घुटने से मौके पर मौत हो गई। जबकि बहू और एक पोता मलवे दबे होने के बाद भी किसी तरह बच गया। लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनको गंगेव अस्पताल में भर्ती कराया है।

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घटनास्थल पहुंचने के लिए नहीं रास्ता

बताया गया कि घटनास्थल पहुंचने के लिए गांव में रास्ता नहीं है। घुटने पर कीचड़ होते हुए स्थानीय प्रशासन टीम पहुंची है। जिनमें एसडीएम केपी पाण्डेय और एसडीओपी, तहसीलदार सहित अन्य लोग घटनास्थल में मौजूद है। गांव के सरपंच और सचिव के प्रति लोगों में काफी नाराजगी है। वहीं गांव के लोग जोर-शोर लगा कर कह रहे हैं कि कलेक्टर को बुलाइये।

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कलेक्टर के आने के बाद ही उठेगी लाश

आरोप है कि जिस गांव में आजादी के 76 साल बाद सड़क तक न बनी हो। उस गांव में लोग इसी तरह इलाज के आभाव में मरते रहेगे। दावा किया जा रहा है कि अगर समय रहते रेस्क्यू चलाया जाता तो सबको बचाया जा सकता था। लेकिन सड़क न होने के कारण शासन प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। ऐसे में जब तक घटनास्थल पर कलेक्टर इलैया राजा टी नहीं पहुंचते। तब तक लाशें नहीं उठेगी।

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नहीं मिला शासन की योजनाओं का लाभ

आरोप है कि आज तक मृतक गरीब परिवार को शासन की किसी योजना का लाभ नहीं दिया गया। और न ही किसी प्रकार की राहत पहुंचाई गई। परिवार काफी गरीब था। जबकि देशभर में कच्चे मकान वालों को पीएम आवास मुक्त में दिया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण स्तर पर योजना का लाभ किसी को नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति में गांव के लोग मौके में कलेक्टर को बुलवाना चाह रहे हैं। फिलहाल स्थानीय प्रशासन समझाने का प्रयास कर रहा है तेज बारिश चलने के कारण वहां की व्यवस्था बिगड़ी हुई है।



क्या कलेक्टर दोषी लोगों के खिलाफ करेंगे कोई कार्यवाही …?

रीवा जिला प्रशासन ने घटना मे चार लोगो की मरने की पुष्टि की हैं,

सवाल जिम्मेदारों से हैं.... ?

सम्बंधित ग्राम पंचायतों में तैनात अमला सरपंच /सचिव और जनपद पंचायत के अधिकारी यदि इन गरीबों को सरकारी योजना (प्रधानमंत्री आवास)  का लाभ दिलाया होता तो शायद  इन गरीबो की  मौत इस तरह से नहीं होती, लेकिन भ्रष्ट कर्मचारी और अफसर शाही के आगे गरीबी ऐसे ही दफ़न हो जाती हैं, घुचियारी गांव की घटना कुछ यही दर्शा रही, क्योकि खपरैल कच्चा माकान धराशाई होने से मिट्टी के मलवे में दफन हो जाने वाले लोगों की मौत प्राकृतिक आपदा की परिधि से बाहर है, प्रकृति तो अपना काम करेगी ही, लेकिन यह मानव जनित अपराध भी है, क्योकि गरीबो को पक्का माकान (प्रधानमंत्री आवास योजना) का लाभ हासिल नहीं हुआ, और उन्हें आज मौत के मुंह में डाल दिया गया. 

जिला कलेक्टर महोदय....  अगर इस योजना का लाभ पहुंचाने मे जिम्मेदारों द्वारा लापरवाही हुई है तो सरपंच /सचिव को तत्काल गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर उन गरीबों असहायों की मौतों को उचित श्रृद्धांजलि के रूप में निष्पक्षता पूर्ण क़दम उठाए, ताकि मृतक आश्रितों को न्याय मिल सके, और जिले मे इस तरह की घटना की पुनरावृत ना हो सके, एक सबक लेने की जरूरत हैं l

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टमस और बेलन नदी से लगे गावों को किया अलर्ट

बताया गया कि शनिवार की रात से बकिया बराज के 8 गेट एवं बीहर बराज के 12 गेट खोले जा चुका है। साथ ही अदवा डैम का भी एक गेट खोला गया है। रविवार की दोपहर तक बीहर बराज और बकिया बराज के और भी गेट खोलने की आशंका है। जिससे जिले के तराई अंचल में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। ऐसे में जिला प्रशासन के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन तत्काल टमस और बेलन नदी से लगे गावों में रहने वाले व्यक्तियों को अलर्ट कर दिया है। साथ ही गांव में होमगार्ड की टीमें सभी नालों और पुलों पर मुस्तैद की गई।


सोहागी पहाड़ में हुआ भूस्खलन, भारी बारिश से पहाड़ का पिघल गया पत्थर, आकर सड़क पर गिरा,

सोहागी पहाड़ में भूस्खलन

दो दिन से चल रही तेज बारिश के बाद रविवार की सुबह सोहागी पहाड़ में भूस्खलन हुआ है। जिसके बाद पहाड़ की चट्टानें नेशनल हाईवे 30 में आकर गिर गई है। हालांकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। लेकिन सुरक्षा के मददेनजर हाइवे पुलिस ने सोहागी पुलिस की मदद से जेसीबी की मदद से चट्टानें हटवा दी है। साथ ही हाईवे में कई जगह पर पेड़ गिरे है। जिनको सोहागी पुलिस सुबह से हटा रही है।

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बीते दिन हुई 39.4 मिमी वर्षा

कार्यालय अधीक्षक भू अभिलेख के मुताबिक शनिवार को जिलेभर में 39.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। जहां हुजूर में 56.6 मिमी, रायपुर कर्चुलियान में 30.0 मिमी, गुढ़ में 45.0 मिमी, सिरमौर में 40.2 मिमी, त्योंथर में 27.0 मिमी, मउगंज में 86.2 मिमी, हनुमना में 58.4 मिमी, सेमरिया 9.0 मिमी, मनगवां 25.0 मिमी, जवा 26.0 मिमी, नईगढ़ी में 30.0 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि 1 जून से 31 जुलाई तक कुल औसत वर्षा 473.2 मिमी हो चुकी है।

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तराई क्षेत्र में कई नदी नालों पर आई बाढ़

बताया गया कि बारिश के कारण नईगढ़ी-बहूती मार्ग, सोहागी-बड़ागांव का मुख्य मार्ग और त्योंथर क्षेत्र के धोबा नाला में बाढ़ के हालात है। ऐसे में कलेक्टर इलैयाराजा टी, एसपी राकेश कुमार सिंह पूरे जिले में नजरें बनाए हुए है। वहीं दूसरी तरफ सीधी और सतना जिले का पानी रीवा की ओर आने के कारण जिलेभर की बड़ी नदिया उफान पर है। पटेहरा के पास टमस और बेलन नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

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